नेताओं द्वारा फैलाया जाने वाला भ्रष्टाचार है बेरोजगारी का कारण : शांता कुमार

पूर्व मुख्यमंत्री एवं पूर्व केंद्रीय मंत्री शांता कुमार ने कहा कि विश्व में 190 देश हैं, इनमें से कुछ देश खुशहाल हैं, गरीबी नहीं है, बेरोजगारी भी नहीं है। कुछ देशों में बहुत अधिक गरीबी और बेरोजगारी है।

हर वर्ष इस संबंध में विस्तृत रिपोर्ट छपती है। इस खुशहाली और बदहाली का एक ही कारण है कि ईमानदार और अनुशासन से खुशहाली आती है और बेईमानी, भ्रष्टाचार से बदहाली आती है।

उन्होंने कहा कि भारत 2047 तक पूर्ण रूप से खुशहाल होने की कोशिश कर रहा है। इस दृष्टि से ईमानदारी और नियम के अनुसार काम करने वाला प्रत्येक व्यक्ति प्रशंसा का पात्र है।

भारत के प्रशासन में भी भ्रष्टाचार का बोलबाला है। इसके बाद कुछ ऐसे लोग हैं जो नियम और ईमानदारी से काम करने की कोशिश करते हैं।

उनकी सब जगह सराहना होनी चाहिए। शांता कुमार ने कहा कि देश का यह कितना दुर्भाग्य है कि इस प्रकार के कर्त्तव्यनिष्ठ और ईमानदार अधिकारियों को सरकार से सम्मान मिलना चाहिए और उनको अच्छे पदों पर नियुक्त करके सरकार की गुणवत्ता को बढ़ाना चाहिए।

दुर्भाग्य से ऐसा नहीं हो रहा है। इसका सीधा सा अर्थ यह है कि देश की गरीबी, बेरोजगारी का सबसे बड़ा कारण नेताओं द्वारा फैलाया जाने वाला इस प्रकार का भ्रष्टाचार है।

आज भी भारत के प्रशासन में ऐसे बहुत से अधिकारी हैं जो खेमका की तरह काम करना चाहते हैं या काम करने का साहस करते हैं। इस प्रकार के अधिकारी और नेताओं को जितना अधिक सम्मान बढ़ेगा देश में उतनी अधिक खुशहाली होगी।

खेमका ने सिद्धांतों से कभी भी समझौता नहीं किया
शांता कुमार ने सोलन के महेन्द्र सोफत को बधाई दी है जो कई वर्षों से नियमित रूप से अपनी फेसबुक में ब्लॉग लिख रहे हैं। आज के अपने ब्लॉग में उन्होंने इसी प्रकार के कर्त्तव्यनिष्ठ अधिकारी का जिक्र किया है।

मैंने भी उनका कई बार नाम सुना था। उन्होंने कहा कि हरियाणा के वरिष्ठ अधिकारी अशोक खेमका अपने 33 वर्ष के सेवाकाल के बाद 30 अप्रैल को रिटायर हो गए।

उनके बारे में कई बार अखबारों में समाचार छपे। सबसे पहले 2012 में वह चर्चा में तब आए जब उन्होंने सोनिया गांधी के दामाद राबर्ट वाड्रा द्वारा की गई भ्रष्टाचार की लैंडडीड के इंतकाल को रद्द कर दिया था।

उन्होंने ईमानदारी के साथ और सख्ती से नियम का पालन करते हुए अपने पद पर काम किया। इसी कारण वे किसी भी राजनेता को पसन्द नहीं आए परन्तु उन्होंने कभी भी सिद्धांत और नियमों से समझौता नहीं किया।

इसी कारण राजनेता उनसे नाराज रहे। इसके कारण 33 वर्ष के सेवाकाल में उनका 57 बार तबादला किया गया। किसी भी पद वो 6 महीने से अधिक नहीं रह सके।

वह लगभग हर सरकार के समय प्रताड़ित होते रहे क्योंकि उन्होंने सिद्धांतों और ईमानदारी से कभी भी समझौता नहीं किया।

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