बाल्दा माहणु बन माहणु

ताऊए कणका बाह्णे(बीजने) जो बाल्द (बोल्द) जोड़ीरे थे.. इक बाल्द सिधि नी लगिरी था लाणा कने दैड़ा कोडी जो लगिरी था दोड़ना..

ताऊ बोलदा, “ओए बाल्दा माहणु बण माहणु”..

मिंजो बड़ी भारी हास्सी आई.. मैं बोल्या, “ताऊ बाल्द कीयां बणी सकदा माहणु. ए ता डंगरा हा इस डंगरे ही रहना.

ताऊ मिंजो बखा देखिए बगैर गुस्से मंझ बोल्या, “कानी बणी सकदा माहणु”.. जे माहणु डंगरा बणी सकदा ता डंगरा माहणु कानी बणी सकदा..

मिन्जोगे कोई जवाब नी था.

सच ए ता हा.. डंगरे कम से कम डंगरे ता रहंदे पर माहणु माहणु नी रहन्दा..

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