सासु जी दूधा के ससुर जी निकली आये

इक बारी इक नोई लाड़ी दूध मथणा लगी री थी। जाली जे तिस मंज मक्खन निकली ओंदा ता से अपने ससु के पुछदी की ए मक्खन कुथी रखणा। ता सास समझांदी – इयाँ दूजी बारी मत बोलदी, ए नाँ तेरे सोरे रा नाम हया।

अगले दिन भी सै दूध मथणा लगदी ता अपणी सासु जो बोलदी सासु जी दूधा के ससुर जी निकली आये, इन्हा जो कुथी रखूं।

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