शिमला में बनेगा विश्व का दूसरा सबसे बड़ा रोप-वे

हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला में देश का पहला व दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा रोप-वे बनेगा। शिमला में तारा देवी से लेकर संजौली तक 13.55 किलोमीटर का रज्जू मार्ग बनेगा। उपमुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री ने सचिवालय में शुक्रवार को पत्रकारों से बातचीत में यह बात कही।

बैठक के दौरान उपमुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री

उपमुख्यमंत्री ने बताया कि हम जल्द इस रोप-वे की शुरुआत करने जा रहे हैं। इससे पहले अमरीका में 32 किलोमीटर लंबा प्रोजेक्ट बना है, इसके बाद अब शिमला में विश्व का दूसरा सबसे बड़ा रोप-वे बनाया जा रहा है।

उन्होंने बताया कि इस इको फ्रेंडली प्रोजेक्ट की लंबाई 13.55 किलोमीटर है, जिसमें तीन लाइंस और 13 स्टेशन बनाए जाएंगे। तीन लाइनों में रेड लाइन, ग्रीन लाइन और ब्लू लाइन होगी।

रोप-वे के इस प्रोजेक्ट पर 1555 करोड़ रुपए खर्च किए जाएंगे। प्रोजेक्ट के लिए एनडीबी के साथ टाईअप किया जा रहा है, जिसका हैडक्वार्टर चीन में है। इसमें 20 प्रतिशत प्रदेश सरकार की हिस्सेदारी होगी और आठ प्रतिशत लोन एवं 72 प्रतिशत ग्रांट होगी।

मुकेश अग्निहोत्री ने बताया कि इस प्रोजेक्ट की डीपीआर तैयार हो गई है। इस प्रोजेक्ट के लिए ई-क्लीयरेंस की जरूरत नहीं है और फोरेस्ट क्लीयरेंस की जरूरत है।

शिमला में वाहनों की संख्या लगातार बढ़ रही है, रोप-वे बनने से शिमला शहर में ट्रैफिक की समस्या से लोगों को निजात मिलेगी। 40 साल की ट्रैफिक को मद्देनजर रखते हुए यह प्रोजेक्ट बनाया जा रहा है।

वहीं लोगों को बस किराए के बराबर रोप-वे में सफर करने का लाभ मिलेगा। इस प्रोजेक्ट में शुरुआत में 220 कैबिन बनेंगे और फाइनल प्रोजेक्ट बनकर तैयार होगा, तो 660 कैबिन बनेंगे। इनमें आठ से दस पैसेंजर बैठ सकेंगे।

उपमुख्यमंत्री ने कहा कि रोप-वे की दो से तीन मिनट की सर्विस होगी। रोप-वे के स्टेशनों में तारा देवी, टूटी कंडी पार्किंग, आईएसबीटी, लिफ्ट, सचिवालय, संजौली, आईजीएमसी, ओल्ड बस स्टैंड, आईस स्केटिंग रिंग, 103 नियर होटल सहित 13 स्टेशन बनाए जाएंगे।

उपमुख्यमंत्री ने बताया कि कॉरपोरेशन ने रोप-वे के लिए जो राशि मांगी थी, वह उपलब्ध करवा दी गई है। अढ़ाई साल में प्रोजेक्ट का पहला फेज शुरू कर दिया जाएगा, जबकि प्रोजेक्ट को पूरा होने में पांच साल का वक्त लगेगा।

मुकेश अग्रिहोत्री ने बताया कि तारा देवी-संजौली रोप-वे पूरा होने के बाद परवाणू से शिमला के लिए 38 किलोमीटर का विश्व का सबसे बड़ा प्रोजेक्ट बनाएंगे। 6800 करोड़ की लागत से शिमला-परवाणू प्रोजेक्ट लगाया जाएगा।

नाबार्ड का पहला प्रोजेक्ट बगलामुखी का प्रोजेक्ट है, उसे मार्च तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।

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