ओपीएस-राइडर का निकालेंगे हल : मुख्यमंत्री

शिमला : मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने कहा है कि राज्य में दो लाख से अधिक कर्मचारियों को नया वेतनमान दिया गया है और इनमें से 60 फीसदी को अब तक नए पे-कमिशन की हिसाब से वेतनमान मिल रहा है। तीन चौथाई सरकारी कर्मचारी संशोधित वेतनमान को लेकर अपना ऑप्शन दे चुके हैं। कर्मचारियों को थर्ड ऑप्शन दिया गया है और बाकी प्रक्रिया जल्द पूरी हो जाएगी।

मुख्यमंत्री बजट चर्चा पर जवाब के दौरान विधानसभा के भीतर बोल रहे थे। सीएम ने कहा कि कर्मचारियों की राइडर की डिमांड पर बात की गई है। नए वेतनमान में उच्च वेतन और लाभों की सुरक्षा दी गई है। कर्मचारियों से रिकवरी न हो, इसका प्रावधान किया गया है। नियमों में भविष्य के लिए राइडर लगाने का प्रावधान नहीं है।

पंजाब की तरह 2009 के वेतन नियमों के आधार पर ही वेतन निर्धारण का प्रावधान किया गया है। हालांकि इस बार नियमों में कुछ कंपलेक्सिटी है, लेकिन कर्मचारी संगठनों से आए सभी प्रतिवेदन वित्त विभाग की एक्सपर्ट कमेटी को भेजे गए हैं और इनका हल निकाला जाएगा।

मुख्यमंत्री ने कहा कि नए वेतनमान और संशोधन पेंशन पर राज्य सरकार लगभग 5000 करोड़ हर साल अतिरिक्त खर्च करेगी। उन्होंने दावा किया कि पंजाब और हिमाचल के कर्मचारी और पेंशनरों में से हिमाचल के कर्मचारी ज्यादा खुश किस्मत हैं, क्योंकि यहां दिए पंजाब से ज्यादा मिला है।

मुख्यमंत्री ने एक और आंकड़ा दिया कि हिमाचल प्रदेश के कर्मचारियों को पंजाब के मुकाबले लगभग 10 से 12 फीसदी अधिक सैलरी, डीए और आईआर में रिलीफ  मिला है। उन्होंने यह भी कहा कि हिमाचल ने 21 फीसदी आईआर दिया है, जबकि पंजाब में केवल पांच फीसदी। सीएम ने कहा कि केवल अंतरिम राहत के तौर पर ही हिमाचल के कर्मचारी को अढ़ाई लाख रुपए मिले हैं, जबकि पंजाब के कर्मचारी को 128000 की अंतरिम राहत दी गई है।

यही फायदा पेंशनरों को भी मिला है। मुख्यमंत्री ने ओल्ड पेंशन के विवाद में राष्ट्रीय पेंशन प्रणाली को लेकर भी अपडेट दी। उन्होंने कहा कि हिमाचल प्रदेश पेंशन के मामले में केंद्र सरकार के नियमों के अनुसार 1971 से पेंशन दे रहा है और यहां 2003 में एनपीएस को लागू किया गया है।

वर्तमान में पश्चिम बंगाल को छोड़कर बाकी कहीं ओल्ड पेंशन अभी नहीं है। उन्होंने कहा कि एनपीएस कर्मचारियों को डीसीआरजी लीव, एनकैशमेंट, जीआईएस और एक्स ग्रेशिया, मेडिकल रिइन्बर्समेंट आदि पुरानी पेंशन प्रणाली के कर्मचारियों के बराबर ही दिए जा रहे हैं। डीसीआरजी को लागू करने के बाद 5612 एनपीएस कर्मचारियों को डेढ़ सौ करोड़ का लाभ मिला।

इसी तरह 2009 की इनवेलिड पेंशन अधिसूचना लागू करने से 2200 कर्मचारियों के परिवारों को ओल्ड पेंशन मिलेगी। एनपीएस कर्मचारियों को डीसीआरजी का लाभ ओपीएस की तरह ही दिया जा रहा है और इसकी अधिकतम सीमा 20 लाख कर दी है।

जहां तक ओल्ड पेंशन की डिमांड की बात है, तो उसको लेकर मुख्य सचिव की अध्यक्षता में एक कमेटी बनाई गई है। वह अपनी रिपोर्ट देगी और सरकार उस पर फैसला लेगी। मुख्यमंत्री ने इसके अलावा लोन खनन और माफिया के विपक्ष के आरोपों का खंडन करते हुए तथ्य सदन में रखें।

अब सुरंगें भी बनवा सकेंगे विधायक

विधायक प्राथमिकता से न सिर्फ  अब सड़कों व पुलों का निर्माण होगा, बल्कि नाबार्ड को विधायक प्राथमिकता फंड से टनल बनाने का प्रस्ताव दिया जा सकता है। मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर विधानसभा में इसकी घोषणा की है। बजट अभिभाषण पर चल रही चर्चा के दौरान कई विधायकों ने यह सुझाव दिया था कि टनलों के निर्माण के लिए विधायक प्राथमिकता से फंड खर्च करने की अनुमति प्रदान की जाए।

खासकर जुब्बल कोटखाई विधानसभा क्षेत्र के विधायक रोहित ठाकुर व नादौन विधानसभा क्षेत्र के विधायक सुक्खविंदर सिंह सुक्खु ने इस मामले का उठाया था। मुख्यमंत्री ने बजट अभिभाषण के जवाब में इन विधायकों की ओर से प्रस्तुत किए गए सुझावों का स्वीकार किया और टनल के निर्माण के लिए विधायक प्राथमिकता के तहत नाबार्ड को प्रोपोजल दिए जाने की घोषणा की।

जोगिन्दरनगर की लेटेस्ट न्यूज़ के लिए हमारे फेसबुक पेज को
करें।