20 साल इंतजार के बाद ऊहल परियोजना तैयार

जोगिन्दरनगर : सरकारी क्षेत्र में चुल्ला में स्थित बहुप्रतिक्षित ऊहल बिजली परियोजना आखिर दो दशक के इंतजार के बाद तैयार हो गई है। करीब दो साल पहले इस परियोजना को तैयार किया था और जब इसमें उत्पादन करना था ठीक उससे पहले इसका पेन स्टॉक फट गया। अचानक पेन स्टॉक फट जाने के बाद करोड़ों रुपए का और खर्चा इस परियोजना को लेकर पड़ गया।

जोगिन्दरनगर के चुल्ला में स्थित यह परियोजना नवम्बर में शुरू करेगी उत्पादन

अब यह प्रोजेक्ट तैयार हो गया है, जो नवंबर से उत्पादन में आ जाएगा। जोगिन्दरनगर में स्थित बरोट नामक जगह की ऊहल खड्ड पर बनी 100 मेगावाट क्षमता की इस परियोजना के शुरू होने से सरकारी क्षेत्र को राहत मिलेगी।

हालांकि शुरुआत के कुछ सालों में उस तरह की राहत नहीं रहेगी, क्योंकि इसकी बिजली महंगी दरों पर बेचने की चुनौती सरकार के सामने है।

मगर बाद में यह प्रोजेक्ट सरकार के लिए राहत ला सकता है। जानकारी के अनुसार ऊहल परियोजना में पेन स्टॉक का काम पूरा हो चुका है, जिसके ट्रॉयल भी हो चुके हैं।

यहां पर वाटर फिलिंग का काम अब शुरू किया जाना है, जो कि 15 अक्तूबर तक चलेगा। 15 अक्तूबर तक यहां पूरी तरह से जलभराव कर दिया जाएगा, जिसके बाद टरबाइन की स्पीनिंग शुरू कर दी जाएगी।

ट्रायल रन होने के बाद नवंबर की पहली तारीख को इस प्रोजेक्ट की एक टरबाइन से पावर जनरेशन का काम शुरू करने की तैयारी है।

शुरुआत में एक ही टरबाइन से उत्पादन किया जाएगा जो कि 33.33 मेगावाट क्षमता की होगी। इसके कुछ दिनों बाद दूसरी व तीसरी टरबाइन भी काम शुरू कर देगी। नवंबर में ही तीनों टरबाइन को चालू करने की योजना है।

टनल निर्माण ने किया परेशान

ऊहल परियोजना सालों से विवादों में है क्योंकि यह प्रोजेक्ट करीब एक दशक पहले पूरा हो जाना चाहिए था जो कि नहीं हो सका।

यहां पर तीन बार टनल के निर्माण का काम किया गया, क्योंकि लेकिन टनल निर्माण काफी ज्यादा परेशानी वाला था। इस काम करने वाली कंपनियों ने बीच में ही काम तक छोड़ दिया जिससे भी प्रोजेक्ट में खासी देरी हुई। बार-बार सुरंग के भीतरी हिस्से में भूस्खलन होने से परेशानी बढ़ती रही।

करोड़ों रुपए का अतिरिक्त खर्चा

ऊहल परियोजना को लेकर महालेखाकार हर साल अपनी रिपोर्ट में टिप्पणी करते रहे हैं क्योंकि इस परियोजना को लेकर करोड़ों रुपए का अतिरिक्त खर्चा हुआ है।

इस कारण से प्रोजेक्ट की बिजली का टैरिफ भी काफी ज्यादा होगा और उस टैरिफ पर यहां की बिजली बाजार में बिक पाएगी या नहीं यह कहा नहीं जा सकता।

ऐसे में सरकार को इसके लिए कोई योजना बनानी होगी। बिजली बोर्ड ने अलग से कारपोरेशन का गठन किया था जिसके पास यही महत्त्वपूर्ण प्रोजेक्ट है और शेष परियोजना पावर कारपोरेशन को ट्रांसफर हो चुकी है।

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