टिकरू पुल- राजनीतिक प्रतिद्वंदिता का शिकार?

जोगिन्दरनगर: यहाँ से लगभग पांच किलोमीटर दूर रणा खड्ड में बना पुल आजकल चार पांच पंचायतों की जनता के लिए सफेद हाथी बना हुआ है. लगभग दो वर्ष पहले और विगत मुख्यमंत्री धूमल की बीजेपी सरकार के कार्य काल में बनकर तैयार टिकरू नामक स्थान पर बने इस पुल के किनारों को सड़क से जोड़ा जाना बाकी है जिस कारण इस पुल से होकर जोगिन्दरनगर के लिए आवाजाही बहाल नहीं हो पाई है.

टिकरू से आम लोगों को वाया योरा आना-जाना पड़ता है जहाँ किराया ज्यादा है और रास्ता भी लम्बा है. इस कारण लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ता है. टिकरू से जोगिन्दरनगर के लिए दूसरा मार्ग वाया दारट है. टिकरू पुल से दारट तक पैदल चढ़ाई पड़ती है उसके बाद दारट में वाहन सुविधा मिल पाती है.

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राजनीतिक प्रतिद्वंदिता का शिकार?

बची हुई महज कुछ मीटर सड़क को बनाने में विभागीय अड़चनों से अधिक राजनीतिक अड़चने आड़े आ रही है, ऐसा सुनने में आया है. अंदरूनी सूत्रों की माने तो वर्तमान कांग्रेस सरकार के राज्य में सता सँभालते ही विजयी विपक्षी विधायकों के क्षेत्रों चल रही अधिकतर विभागीय परियोजनाओं को रोक कर मशीनरी और सामग्री ऊपरी क्षेत्रों, जिनमें वर्तमान मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह के चुनावी क्षेत्र भी शामिल हैं, में भेज दिए गये हैं. गौरतलब है कि उक्त पुल प्रदेश बीजीपी के प्रभावशाली नेता ठाकुर गुलाब सिंह के क्षेत्र में पड़ता है.

मजेदार बात यह है कि वर्तमान कांग्रेस सरकार के राज्य में सता सँभालने के कुछ समय बाद इस आधे अधूरे पुल के उद्घाटन का पूरा प्रबंध कर दिया गया था. चूंकि यह पुल अपने स्वाभाविक रूट अर्थात जोगिंदर नगर-दारट वाले रूट से जुड़ नहीं पाया था, प्लान यह था कि जोगिंदर नगर-टिकरू वाया योरा आ कर इस पुल का उद्घाटन कर दिया जाए. सूत्रों के अनुसार मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह स्वंय उद्घाटन करने वाले थे. लेकिन समय रहते स्थानीय जनता और बीजेपी कार्यकर्ताओं को प्लान की जानकारी मिल गयी. इन लोगों ने चेतावनी दी कि यदि ऐसा कोई प्रयास किया गया तो जनता काले झंडे ले कर सड़क कर उतरेगी और खानापूर्ति और श्रेय लेने के किसी भी फूहड़ प्रयास को पूरा नहीं होने देगी. बस फिर क्या था कांग्रेस सरकार को उद्घाटन का कार्यक्रम रद्द करना पड़ा.

क्या कहती है स्थानीय जनता?

इस पुल और कई अन्य क्षेत्रीय सड़क परियोजनाओं पर धीमी और असंतोषजनक प्रगति को लेकर स्थानीय जनता का एक वर्ग भूतपूर्व लोक निर्माण मंत्री ठाकुर गुलाब सिंह से भी खफा है. लोगों का कहना है कि यदि वह (ठाकुर गुलाब सिंह) चाहते तो अपने कार्यकाल में वह क्षेत्र में सड़क यातायात तंत्र को अंत्यंत बेहतर और सुदृढ़ स्थिति में ला सकते थे लेकिन ऐसा नहीं हो सका. अब लोग चाहते हैं कि वर्तमान आधी-अधूरी परियोजनाओं को पूरा करवाने के लिए ठाकुर गुलाब सिंह विधान सभा में मजबूती से अपना पक्ष रखें और जनता को आ रही परिवहन की समस्याओं से निजात दिलाएं.

दशकों पुराने सपने अभी तक अधूरे

इस पुल से आवाजाही सुचारू होने से टिकरू, रोपड़ी, खुड्डी, व बल्ह जौली पंचायत की जनता को लाभ होगा. इस पुल के बन जाने व सुचारू हो जाने से जोगिंदर नगर-लडभड़ोल की सड़क दूरी पच्चीस से तीस किलोमीटर जबकि खुड्डी व रोपड़ी के लोगों का सफ़र दस से पंद्रह किलोमीटर कम होगा. वहीं बल्ह, टिकरू व रोपड़ी पंचायत के गाँवों की जोगिन्दरनगर से दूरी भी इस मार्ग के सुचारू होने से कम हो जायेगी.

कहा जाता है कि यह पुल और क्षेत्र की कुछ अन्य सड़क संपर्क परियोजनाएं पिछले कई वर्षों से जबकि कुछ तो कई दशकों से लंबित है. दशकों से लंबित एक परियोजना बैजनाथ-आहजू-मकरीडी-बसाही सड़क है जो कि अभी तक पूरी नहीं हो पायी है.

टिकरू पंचायत के उपप्रधान सुरेश कुमार ने बताया कि इस पुल से आवाजाही न होने के कारण आम जनता के साथ साथ खासकर बुजुर्गों को काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ता है. उन्होनें सरकार से मांग की है कि इस पुल से यातायात की आवाजाही जल्द से जल्द शुरू की जाये. वहीं लोक निर्माण विभाग के अधिशाषी अभियंता बीएस बरवाल ने कहा कि लोगों की समस्या को देखते हुए इसका समाधान जल्द ही कर दिया जायेगा.

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