कम से कम 15 साल हो टैक्सी परमिट की वैधता : मुकेश अग्निहोत्री

टैक्सी परमिट की वैधता बढ़ाने का मामला केंद्र सरकार के समक्ष उठा है। साथ ही ड्राइविंग टेस्ट स्कूल और ऑटोमैटिक टेस्टिंग स्टेशन को अलग-अलग स्थापित करने की व्यवस्था का आग्रह भी किया गया है।

परिवहन विकास परिषद की बैठक में गूंजे हिमाचल के मुद्दे

गुरुवार देश भर के परिवहन मंत्रियों की राष्ट्रीय स्तर की बैठक में उपमुख्यमंत्री मुकेश अग्रिहोत्री ने इन मुद्दों को केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी के समक्ष प्रमुखता के साथ उठाया है।

जानकारी के अनुसार गुरुवार को केंद्रीय सडक़ परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी की अध्यक्षता में दिल्ली में 43वीं परिवहन विकास परिषद की राष्ट्रीय स्तर की बैठक का आयोजन हुआ।

बैठक में मुकेश अग्निहोत्री ने हिमाचल प्रदेश के परिवहन क्षेत्र से जुड़े महत्त्वपूर्ण मुद्दे उठाए और उनके समाधान के लिए केंद्र सरकार से सहयोग का आग्रह किया।

उप-मुख्यमंत्री ने कहा कि केंद्र सरकार द्वारा टैक्सी परमिट की वैधता वर्तमान में 12 वर्ष निर्धारित है। इससे वाहन मालिकों को कठिनाई का सामना करना पड़ रहा है।

उन्होंने टैक्सी परमिट की अवधि को कम से कम 15 वर्ष या वाहन के सड़क पर चलने योग्य रहने तक बढ़ाने का आग्रह किया।

उन्होंने प्रदेश की कठिन भौगोलिक परिस्थितियों का उल्लेख करते हुए कहा कि राज्य में भूमि की उपलब्धता सीमित है। लिहाजा उन्होंने क्लस्टर योजना के तहत ड्राइविंग टेस्ट स्कूल और ऑटोमैटिक टेस्टिंग स्टेशन को अलग-अलग स्थापित करने की व्यवस्था करने का आग्रह केंद्रीय मंत्री से किया है।

इसके अलावा उन्होंने मालवाहक वाहनों जैसे टिप्पर की वाहन क्षमता वास्तविक ढुलाई के अनुसार तय करने का सुझाव भी दिया।

मुकेश अग्निहोत्री ने कहा कि प्रदेश सरकार राज्य में एक प्रभावी, सुरक्षित और जनहितैषी परिवहन व्यवस्था विकसित करने के लिए केंद्र सरकार के साथ मिलकर निरंतर प्रयास कर रही है।

बैठक में केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने हिमाचल प्रदेश की सभी मांगों पर सहानुभूतिपूर्वक विचार करने का आश्वासन दिया।

उन्होंने कहा कि केंद्र राज्यों को आधारभूत ढांचे के विकास, परिवहन सुधारों तथा स्वच्छ और टिकाऊ परिवहन व्यवस्था को बढ़ावा देने में हर संभव सहयोग प्रदान करेगा।