एक्यूरेसी पैराग्लाइडिंग प्री-वर्ल्ड कप में रूस के पायलट नहीं लेंगे हिस्सा

बीड़ बिलिंग : पैराग्लाइडिंग के लिए विश्व प्रसिद्ध स्थल बिलिंग घाटी में 5 से 9 अप्रैल तक होने जा रहे एक्यूरेसी पैराग्लाइडिंग प्री-वर्ल्ड कप में रूस के पायलट हिस्सा नहीं लेंगे।

प्रतियोगिता के दौरान अंतर्राष्ट्रीय मानकों को सुनिश्चित करने के लिए एफएआई, फैडरेशन ऑफ एयरोनॉटिकल और पीडब्ल्यूसीए के अधिकृत पर्यवेक्षक प्रतियोगिता के निर्णायक और आयोजन समिति में अपनी अहम भागीदारी निभाएंगे।

बिलिंग पैराग्लाइडिंग एसोसिएशन के अध्यक्ष अनुराग शर्मा ने बताया कि प्रतियोगिता में 125 पायलट हिस्सा लेंगे जिनमें विभिन्न देशों के 102 प्रतिभागियों द्वारा पंजीकरण करवाया गया है। इसके अलावा आर्मी स्पोर्ट्स विंग के 10 पायलट प्रतियोगिता में हिस्सा लेंगे।

इन देशों के पायलटों ने करवाया पंजीकरण
कोरोना काल के बाद बीड़-बिलिंग घाटी में आयोजित की जाने वाली यह पहली प्रतियोगिता होगी जिसमें अंतर्राष्ट्रीय स्तर के पैराग्लाइडर पायलट हिस्सा लेंगे।

प्रतियोगिता में डोप टैस्ट नहीं होगा
राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय खेल स्पर्धाओं की तरह पैराग्लाइडिंग प्रतियोगिता में कोई डोप टैस्ट नहीं होगा। एसोसिएशन की दलील है कि साहस और रोमांच के इस खेल में शारीरिक कसरत की आवश्यकता नहीं होती।

यह केवल दिमाग और हवा के वेग पर निर्भर करता है। इसलिए डोप टैस्ट की जरूरत नहीं होती।

सुरक्षा की दृष्टि से किए इंतजाम
किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए अटल बिहारी वाजपेयी पर्वतारोहण संस्थान मनाली और उत्तराखंड में हैलीकॉप्टर स्टैंडबाई तैनात रहेंगे।

भारतीय सेना का हैलीकॉप्टर अभी सुरक्षा की दृष्टि से पालमपुर में स्टैंड में रखा जाएगा। विभिन्न प्रकार की रैस्क्यूू टीमें भी पैराग्लाइडिंग पायलटों की उड़ान पर नजर रखेंगी।

टेक ऑफ प्वाइंट और लैंडिंग स्थल पर अतिरिक्त मार्शल और एम्बुलैंस तैनात रहेंगी। प्रतियोगिता के दौरान बीड़-बिलिंग घाटी नो फ्लाइंग जोन घोषित रहेगी जहां ड्रोन या फिर हैलीकॉप्टर की उड़ान पर प्रतिबंध रहेगा।

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