क्लास थ्री-फोर कर्मचारियों से की जा रही वसूली गैरकानूनी

हिमाचल प्रदेश हाई कोर्ट ने गुरुवार को एक महत्त्वपूर्ण निर्णय में व्यवस्था दी है कि क्लास थ्री और फोर कर्मियों को विभागों द्वारा वेतन निर्धारित करते समय की गई अधिक अदायगी की वसूली गैर कानूनी है। हाई कोर्ट ने कहा कि कर्मियों द्वारा जब तक संबंधित विभाग को वेतन निर्धारण के समय किसी तरह से गलत तथ्य न दिए गए हों, तो फिर देय वेतन से अधिक की अदायगी के नाम पर उनसे नियोक्ता वसूली नहीं कर सकता।

हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय ने इस संबेध में व्यापक दिशानिर्देश जारी किए, जिसके तहत नियोक्ताओं द्वारा वसूली कानून में स्वीकार्य नहीं होगी। न्यायाधीश तरलोक सिंह चौहान और न्यायाधीश सीबी बरोवालिया की खंडपीठ ने कहा कि तृतीय और चतुर्थ श्रेणी सेवा (समूह सी और समूह डी सेवा) से संबंधित कर्मचारियों से वसूली गैरकानूनी  है।

सेवानिवृत्त कर्मचारियों या एक वर्ष के भीतर सेवानिवृत्त होने वाले कर्मचारियों से वसूली के अलावा, वसूली के आदेश की भी अनुमति नहीं है। कर्मचारियों से वसूली, जब वसूली का आदेश जारी होने से पहले पांच साल से अधिक की अवधि के लिए अतिरिक्त भुगतान किया गया हो। उन मामलों में वसूली, जहां एक कर्मचारी को एक उच्च पद के कर्तव्यों का निर्वहन करने के लिए आवश्यक है और तदनुसार गलत तरीके से भुगतान किया गया है। भले ही उसे एक निम्न पद के खिलाफ  काम करने का अधिकार होना चाहिए था।

तृतीय श्रेणी और चतुर्थ श्रेणी के कर्मचारियों से उपक्रम के आधार पर भी वसूली की अनुमति नहीं है। इन दिशानिर्देशों को जारी करते हुए अदालत ने आगे कहा कि उपरोक्त श्रेणियों के मामले उदाहरण के रूप में हैं और किसी भी सटीक या स्पष्ट रूप से परिभाषित, पर्याप्त रूप से चैनलाइज्ड और स्पष्ट दिशानिर्देश या कठोर सूत्र निर्धारित करना और किसी भी विस्तृत सूची असंख्य प्रकार के मामले देना संभव नहीं हो सकता है।

इसलिए ऐसे प्रत्येक मामले को अपनी योग्यता के आधार पर तय करने की आवश्यकता होगी। इस प्रकार यह स्पष्ट होगा कि वसूली के संबंध में कोई स्पष्ट नियम नहीं बनाया जा सकता है और प्रत्येक मामले को ऊपर वर्णित व्यापक दिशानिर्देशों को ध्यान में रखते हुए अपनी योग्यता के आधार पर तय करना होगा।

अदालत ने यह फैसला उन याचिकाकर्ताओं द्वारा दायर याचिकाओं के एक समूह पर पारित किया, जो या तो सेवारत हैं या सेवानिवृत्त सरकारी कर्मचारी हैं या उनके उत्तराधिकारी। इन सभी ने  नियोक्ता द्वारा उनके खिलाफ  जारी वसूली नोटिस को चुनौती दी थी।

कोर्ट ने कहा

कर्मियों द्वारा जब तक संबंधित विभाग को वेतन निर्धारण के समय किसी तरह से गलत तथ्य न दिए हों, तो फिर देय वेतन से अधिक की अदायगी के नाम पर उनसे नियोक्ता वसूली नहीं कर सकता।

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