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प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत गांवों तक सड़क पहुंचाने से पहले सर्वे के आदेश

केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्रालय ने प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना में की गाइडलाइन इश्यू नहीं की है। केंद्र ने समूचे देश में इस योजना को लेकर पहले सर्वेक्षण पूरा करने के आदेश दिए हैं।

हिमाचल में भी अब नेशनल रूरल इन्फ्रास्ट्रक्चर डिवेलपमेंट एजेंसी (एनआरआईडीए) के तय दिशानिर्देश के आधार पर उन क्षेत्रों का सर्वे किया जाएगा, जहां की आबादी पीएमजीएसवाई के नियमों के दायरे में आती होगी। इसके बाद डीपीआर बनेगी और फिर केंद्र सरकार सडक़ों को मंजूरी देगी।

दिल्ली में ग्रामीण विकास मंत्रालय की बैठक में यह फैसला लिया गया है। अब प्रधानमंत्री ग्राम सडक़ योजना के चौथे चरण के लिए व्यापक स्तर पर सर्वेक्षण अभियान छेड़ा जाएगा।

केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्रालय ने पीएमजीएसवाई ग्राम सडक़ सर्वे ऐप पर सड़क से दूरवर्ती ग्रामीण इलाकों की डिजिटल मैपिंग के आदेश दिए हैं।

इस ऐप के माध्यम से डाटा जुटाने के बाद यह खुद व खुद जिओ-सडक़ ऐप पर चला जाएगा। जहां इसे दिल्ली में बैठे केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्रालय के अधिकारी संशोधित कर पाएंगे या इसकी मंजूरी दे सकेंगे।

इसके बाद अंतिम डाटा प्रधानमंत्री गति शक्ति पोर्टल पर चला जाएगा और इसके बाद डीपीआर बनाने की प्रक्रिया शुरू होगी। इस पूरे चक्र में एनआरआईडीए ऐप और प्लानिंग टूल में काम करेंगे।

दिल्ली में प्रधानमंत्री ग्राम सडक़ योजना के चौथे चरण का जो प्रारूप तय हुआ है, उसके अनुसार केंद्र सरकार ने मैदानी इलाकों में 500 से अधिक और पहाड़ी इलाकों में 250 तक की आबादी को परियोजना के दौरान सड़क से जोडऩे का फैसला कर लिया है।

पूर्वाेत्तर राज्यों और विशेष श्रेणी के क्षेत्रों समेत ट्राइबल एरिया, बर्फबारी प्रभावित क्षेत्र और अकांक्षी जिले या ब्लॉक में 100 से अधिक आबादी वाले क्षेत्रों को सड़क से जोड़ा जाएगा।

इसके अलावा वामपंथी उग्रवाद प्रभावित नौ राज्यों को पीएमजीएसवाई के चौथे चरण में सडक़ सुविधा मिलने जा रही है। ग्रामीण विकास मंत्रालय ने इस चयन के लिए 2011 की जनगणना को आधार माना है।

अब दोबारा होगा सर्वे

प्रधानमंत्री ग्राम सडक़ योजना के चौथे चरण के शुरू होने से पहले ही हिमाचल में पीडब्ल्यूडी ने सर्वेक्षण किया है। हालांकि अब इसका ज्यादा फायदा नहीं होगा।

सर्वेक्षण के आधार पर चुने गए सभी गांव पीडब्ल्यूडी को सड़क सर्वे ऐप और जिओ-सडक़ पर अपलोड करना होगा। इसके बाद दिल्ली में अधिकारी यह तय करेंगे कि सर्वे में जिस गांव का चयन किया गया है, उसे सड़क की जरूरत है या नहीं।

राज्य से जिन करीब 700 गांव की जो सूची तैयार की गई है, उसमें कांट-छांट की संभावना है। पीडब्ल्यूडी ने योजना के प्रारूप में 100 से 250 तक की आबादी वाले 497 और 250 से अधिक आबादी वाले 219 गांवों का चयन किया है।

जो भी आदेश मिलेंगे, उन पर अमल करेंगे

लोक निर्माण विभाग के प्रमुख अभियंता एनपी सिंह ने बताया कि ग्रामीण विकास मंत्रालय से पीएमजीएसवाई को लेकर जो भी आदेश मिलेंगे, पीडब्ल्यूडी उन पर अमल करेगा।

उन्होंने कहा कि पीएमजीएसवाई के चौथे चरण का काम जल्द से जल्द शुरू हो, इसके लिए प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने बताया कि दिल्ली की बैठक में हिस्सा लेने गए अधिकारियों के लौटते ही पीएमजीएसवाई परियोजना पर पीडब्ल्यूडी तेजी से काम शुरू कर देगा।

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