पद्धर उपमंडल का चार दिवसीय काहिका उत्सव शुरू

पद्धर उपमंडल के सुराहण गांव में चार वर्ष बाद मनाया जाने वाला काहिका उत्सव चौहारघाटी के देवाधिदेव हुरंग नारायण के आगमन से शुरू हो गया। आराध्य देव हुरंग नारायण ने घोघरधार स्थित नारायण खुह की परिक्रमा कर देव समाज से जुड़े इस धार्मिक उत्सव का विधिवत आगाज किया। इस दौरान घोघरधार की वादियां देवता के वाद्ययंत्रों की सुरीली ध्वनि से गुंजायमान हो उठी। देवता के गुर द्वारा देवखेल के माध्यम से नारायण खुह में पूजा-अर्चना की गई। इस दौरान घोघरधार की वादियों में गहरी धुंध छाई रही।

पूजा-अर्चना के बाद डायनापार्क और हिमरीगंगा होते हुए देवता अपने देवलुओं कारदारों समेत लाव लश्कर सहित सुराहण गांव पहुंचे। यहां पद्धर क्षेत्र के अधिष्ठाता देव सूत्रधारी ब्रह्मा के कारदारों और बजंतरियों ने देव हुरंग नारायण का भव्य स्वागत किया गया। देव हुरंग नारायण रात्रि को सुराहण गांव में अपने मंदिर में विराजमान हुए। काहिका उत्सव में विशेष भूमिका निभाने वाला नड़ परिवार भी जोगिन्दरनगर  के हराबाग़ से नंगे पांव पैदल चलकर सुराहण गांव पहुंचा।

वीरवार को काहिका स्थल में देव हुरंग नारायण अपने कारदारों के साथ स्वयं नड़ वेद सजाएंगे। इसके लिए फुटाखल जंगल से देवदार की चार शाखाएं लाई गई हैं। नड़वेद सजाने के बाद नड़ परिवार सबसे पहले देव हुरंग नारायण का छिद्रा करवाया जाएगा। उसके बाद आमजनमानस का छिद्रा करवाने की अनुमति मिलेगी। शुक्रवार को नड़रगड़ा रस्म अदा की जाएगी। यह रस्म नड़ और देवता दोनों के लिए अग्निपरीक्षा होगी। उत्सव के बीच मूर्छित हो जाने बाद नड़ को दैवीय शक्ति से जिन्दा किया जाएगा।

काहिका उत्सव में इस बार देव कारज की महज रस्में की जाएगी। कोरोना के चलते कोई भीड़ इकट्ठा नहीं होगी। इसके लिए उपमंडल प्रशासन ने दोनों मुख्य प्रवेश द्वारों में पुलिस बल भी तैनात किया है। देव समिति अध्यक्ष लेख राम ठाकुर ने लोगों से आह्वान किया है कि बेवजह भीड़ जुटाने से परहेज करें। देवता के साथ आवश्यक कार्य को लेकर ही हाजिरी भरें।

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