HRTC का कंडक्टर बना एक परिवार के लिए फरिश्ता

नाहन: आज के समय में जब हर कोई पैसे के पीछे दौड़ रहा है और थोड़े से पैसों के लिए अपना ईमानदांव पर लगा देता है ऐसे कुछ लोगों में आज भी ईमानदारी बाकी है। एक ऐसे ही परिचालक ने ईमानदारी की मिसाल पेश की है। एचआरटीसी के नाहन डिपो में तैनात राजेंद्र ठाकुर परिचालक चंडीगढ़ के एक परिवार के लिए फरिश्ता बन गए। राजेंद्र की एचआरटीसी में काफी प्रशंसा की जा रही है। ऐसे समय पर परिचालक राजेंद्र ने उन अज्ञात लोगों की मदद की, जब वह 50 हजार की राशि लेकर पीजीआई चंडीगढ़ में किसी अपने के इलाज के लिए जा रहे थे।

50 हजार रुपए की नकदी बस में छूटी

बताया जाता है कि परिचालक अमृतसर-देहरादून रूट पर सेवाएं दे रहे थे। देहरादून आते समय जब वह चंडीगढ़ के 43 सेक्टर में रुके, तो इसी दौरान कुछ अनजान व्यक्ति ने उनसे काउंटर पर संपर्क किया। उन व्यक्तियों ने परिचालक को बताया कि वहनाहन डिपो की सरकारी बस एचपी18बी-6395 में सफर कर हाउसिंग बोर्ड कालोनी पर उतरे थे। लेकिन, उतरते वक्त उनके पास 50 हजार रुपए की नकदी बस में ही छूट गई। इसके बाद उसने इत्तफाक से चंडीगढ़ में रुकी इसी बस से संपर्क करने की कोशिश की।

परिचालक ने पैसे वापस कर कायम की ईमानदारी की मिसाल

खास बात यह है कि इस दौरान बस चंडीगढ़ में ही रुकी थी। जबकि बस के चालक व परिचालक भी आस-पास नहीं थे। परिचालक ने मौके पर बसों में जांच पड़ताल शुरू कर दी। अंत समय में वह उसी बस तक भी पहुंच गए जिसमें नकदी गुम हो गई थी। परिचालक ने बस की सीट के पीछे फंसे 50 हजार रुपए को लेकर अज्ञात लोगों को लौटा दिया। गनीमत यह रही कि इस नकदी पर बस में कालाअंब से चंडीगढ़ तक बैठे यात्रियों की नजर नहीं पड़ी। उन्होंने बताया कि 2007 में देहरादून में 9700 व हरिपुरधार में2008-09 में 11 हजार की नकदी वापिस लौटाई।

स्रोत : पंजाब केसरी

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