4 बार घोषणा के बावजूद आखिर क्यों शुरू नहीं हो रही रेल सेवा ??

पठानकोट -जोगिन्दरनगर रेल लाइन पर पिछले दो सालों से ट्रेन न चालू होने की वजह से लोगों में गुस्सा है। लिहाजा महकमे को लोगों के गुस्से का सामना करना पड़ रहा है। गौर हो इस रेल मार्ग पर अधिकांश ग्रामीण रेलवे पर ही निर्भर हैं।

बसों में महंगी यात्रा से भी उनकी मुसीबतें बढ़ी हैं। लोगों का कहना है कि उत्तर रेलवे के जम्मू डिवीजन के शीर्ष अधिकारी देश की सबसे लंबे नेरो गेज रेल लाइन कांगड़ा घाटी रेलमार्ग को चलाने में सक्षम नहीं है। यह महकमे की पिछले छह महीने की कार्यप्रणाली ने साबित कर दिया है।

चार बार घोषणा के बावजूद रेलवे मंडल जम्मू कांगड़ा रेल का संचालन आरंभ नहीं कर पाया। कांगड़ा रेलवे का इतना बुरा हाल फिरोजपुर मंडल के पिछले नौ दशक में भी नहीं हुआ।

बताते हैं पिछले हफ्ते टीम आई थी और फिटनेस भी दे दी गई और टाइम टेबल बनाने की बात कही गई। लेकिन ट्रेन चालू न हुई। कांगड़ा के समाजसेवी संजीव कुमार कहते हैं कि जब तक कांगड़ा रेलवे को अपना रेल डिवीजन नहीं मिलता, इनसे कोई भी उम्मीद नहीं की जा सकती है।

पठानकोट -जोगिन्दरनगर रेल लाइन पर विभाग ट्रेन क्यों नहीं चला पाया इसका कोई जवाब महकमे के पास नहीं है। वैसे चक्की पुल तैयार पड़ा है लेकिन यहां सिर्फ ट्रायल हो रहे हैं।

पिछले दो सालों से बंद पड़े इस रेल मार्ग का चालू होना हकीकत से कोसों दूर है। लोग पूछ रहे हैं आखिर रेलवे विभाग पठानकोट जोगिंद्रनगर रेल लाइन को क्यों नहीं चालू कर पा रहा।

रानीताल से लेकर जवाली तक जितने भी गांव बसे हैं उनकी लगभग आबादी रेल लाइन पर ही निर्भर है। लेकिन वह रेल से महरूम है।

रेलवे विभाग दो सालों की जद्दोजहद के बाद समेला से पपरोला तक ही ट्रेन चालू कर पाया है। जबकि यह ट्रेन पठानकोट से जोगिंद्रनगर तक चलनी चाहिए।

क्यों हो रही देरी

गौर हो कांगड़ा घाटी रेलमार्ग अंग्रेजी शासनकाल में साधन न होने के बावजूद महज तीन वर्ष के रिकार्ड समय में तैयार हुई थी। लेकिन अब इसे दुरुस्त करने में ही उससे दोगुना समय लगा दिया है।

पिछले दो दशक से इस रेलमार्ग पर रेल यातायात उपलब्ध करवाने में रेलवे विभाग ने हाथ खड़े कर दिए हैं।

जनता जानना चाहती है कि वो भारतीय रेल जो कश्मीर में विश्व का सबसे ऊंचा रेलवे पुल बना सकता है वो कांगड़ा घाटी रेलमार्ग पर रेल यातायात सुचारू ढंग से उपलब्ध क्यों नहीं करवा पाया।