
जोगिन्दर नगर । मंडी क्षेत्रीय अस्पताल सहित जिला के सभी सरकारी अस्पतालों में अब मरीजों को अल्ट्रासाउंड, ईसीजी, दंत एक्सरे और बेरा टेस्ट (श्रवण परीक्षण) के लिए शुल्क चुकाना होगा। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) ने इन टेस्ट को निशुल्क 133 डायग्नोस्टिक टेस्ट की सूची से हटा दिया है। अब मरीजों को निजी अस्पतालों की तरह अल्ट्रासाउंड के 300, ईसीजी के 100, दंत एक्सरे के 60 और बेरा टेस्ट के लिए 320 रुपये देने होंगे।
पिछले कुछ वर्षों में क्षेत्रीय अस्पताल में अल्ट्रासाउंड पर 150 रुपये शुल्क लिया जाता था, जिसे बाद में निशुल्क कर दिया गया था। मगर अब एनएचएम द्वारा अप्रैल 2022 के निजी कंपनियों के साथ हुए समझौते का हवाला देते हुए अल्ट्रासाउंड और ईसीजी को फ्री डायग्नोस्टिक टेस्ट की सूची से बाहर कर दिया गया। इस संबंध में सरकारी अस्पतालों के स्वास्थ्य अधीक्षकों को अधिसूचना भी जारी कर दी गई है।
क्षेत्रीय अस्पताल मंडी में पिछले करीब दो सप्ताह से इन आदेशों की अनुपालना करते हुए मरीजों से शुल्क वसूला जा रहा है। वरिष्ठ नागरिक सभा मंडी के संयोजक नीरज हांडा, प्रधान ओपी कपूर, अनिल शर्मा, हंसराज और गिरधारी लाल ने एनएचएम के इस फैसले का कड़ा विरोध किया है। उनका कहना है कि गरीब मरीजों को अब टेस्ट करवाने में कठिनाई होगी। उन्होंने मांग की है कि सरकार को इस जनविरोधी निर्णय को वापस लेना चाहिए और गरीब मरीजों को दोबारा निशुल्क जांच सुविधा उपलब्ध करानी चाहिए।
अस्पताल प्रबंधन का तर्क, आरकेएस को होगा फायदा
क्षेत्रीय अस्पताल मंडी के चिकित्सा अधीक्षक डॉ. धर्म सिंह वर्मा ने कहा कि बेरा टेस्ट के लिए पहले से ही 320 रुपये शुल्क लिया जा रहा था। एनएचएम के दायरे में पहले से 133 निशुल्क टेस्ट शामिल थे, जिसका लोगों को लाभ मिल रहा था। अब अल्ट्रासाउंड और ईसीजी को इस सूची से बाहर किया गया है, ताकि इसका लाभ अस्पताल की रोगी कल्याण समिति (आरकेएस) को मिल सके। इससे अस्पतालों में बेहतर सुविधाएं मुहैया करवाई जा सकें।Ω