बरोट के प्रभावितों की मदद करे सरकार

बरोट — लक्कड़ बाजार में तबाही के भयावह मंजर के बाद लोग मलबे में दुकानों की निशानियां ढूंढ रहे हैं। जहां कभी उनकी रोजी-रोटी प्रदान करने वाली दुकानें हुआ करती थीं बाढ़ के बाद अब वहां चारों ओर कीचड़ ही कीचड़ हैं। कुछ एक दुकानें बहने से बच गई हैं वहां भी सामान या तो बह गया है या फिर पानी और कीचड़ से पूरी तरह खराब हो गया है। रोजी रोटी के एकमात्र सहारे के छिन जाने से दुकानदारों को अपने परिवार के सदस्यों का भरण पोषण करना मुश्किल हो गया है। आंखों में आंसू लिए दुकानदार अब दोबारा कारोबार को शुरू करने की हिम्मत नहीं जुटा पा रहे हैं।

स्थानीय लोग पंजाब बिजली बोर्ड को इसके लिए उतरदायी ठहरा रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि डैम के गेट में तैनात कर्मी अगर सूझबूझ का परिचय देते तो न तो क्षेत्र में तबाही की इबारत लिखी जाती और न ही उन्हें इस कदर रोजी-रोटी से हाथ धोना पड़ता। उहल नदी का जल स्तर कम होने से अब धीरे-धीरे हालात सामान्य होने लगे हैं। एसडीएम विनय मोदी राजस्व महकमे के अधिकारियों के समेत बरोट पहुंच गए हैं। बरोट के अलावा साथ लगते क्षेत्र में बाढ़ से हुई तबाही का टीम आकलन करने में जुट गई है। प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के धरातल तल से पानी तो निकल गया है, लेकिन यह कीचड़ से लबालब हो गया है।

जिन दुकानों को बाढ़ से आंशिक नुकसान हुआ है वहां पर दोबारा दुकानों के सजने का सिलसिला शुरू हो गया है। दुकानदार बाढ़ के मंजर को भूल कर अब नए सिरे से नई जिंदगी की शुरुआत करने लगे हैं। स्थानीय पंचायत प्रधान सुरेश कुमार ने बताया कि मंगलवार को बरोट में आसमान से बरपी प्राकृतिक आपदा ने हालांकि दुकानों को मटियामेट कर दिया है लेकिन लोगों की हिम्मत अभी भी बरकरार हैं।

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