आखिर तैरते पत्थरों का सच क्या है !!

कांगड़ा : हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा जिले में एक अनोखी घटना सामने आई है. यहां पानी के ऊपर पत्थर तैरने का मामले सामने आए हैं. इससे यहां पर लोगों का जमावड़ा लगना शुरू हो गया है. साइंस ब्लागर डॉ. दिनेश मिश्र के अनुसार, ऐसे पत्थरों के कोष्ठों में हवा भरी होती है. इनकी आंतरिक  संरचना एकदम ठोस न होकर स्पंज की तरह होती है. वायु प्रकोष्ठों के कारण ये पत्थर वजन में भारी होने के बाद भी घनत्व के हिसाब से हल्के होते हैं तथा इस कारण ये पत्थर पानी में तैर सकते है.

बाथू की लड़ी में मिल रहे तैरते पत्थर

धर्मशाला के पास बाथू की लड़ी में पानी पर तैरते हुए पत्थर लोगों को मिले हैं. इससे यहां पर लोगों का जमावड़ा लगना शुरू हो गया है. बुधवार को पंचायत फारियां की प्रधान शकुंतला के बेटे विपिन कुमार को पौंग झील में पानी में तैरता करीब अढ़ाई किलोग्राम का पत्थर मिला.

 

पत्थर पर खुदा है “राम”

विपिन कुमार सुबह सैर करने गए तो उसकी नजर तैरते पत्थर पर पड़ी, जिसपर ‘राम’ खुदा हुआ है. वहीं बाथू की लड़ी के समकेहड़ में भी इससे पहले ऐसे तीन पत्थर मिल चुके हैं. वास्तव में पानी में तैरता या न डूबने वाला पत्थर चमत्कार नहीं है.

यह है प्यूमिक स्टोन

ज्वालामुखी का लावा ठंडा होने के बाद कुछ पत्थरों में रोमछिद्रों की तरह सुराख बन जाते हैं. वे खुरदरे भी होते हैं. इन्हें प्यूमिक स्टोन भी कहा जाता है. साइंस ब्लागर डॉ. दिनेश मिश्र के अनुसार, ऐसे पत्थरों के कोष्ठों में हवा भरी होती है. इनकी आंतरिक  संरचना एकदम ठोस न होकर स्पंज की तरह होती है.

तैर सकते हैं पत्थर

वायु प्रकोष्ठों के कारण ये पत्थर वजन में भारी होने के बाद भी घनत्व के हिसाब से हल्के होते है तथा इस कारण ये पत्थर पानी में तैर सकते है. उत्तर भारत को ज्वालामुखी क्षेत्र माना जाता है, इसलिए यहां इस तरह की पत्थर पाए जाते हैं. आजकल ऐसे छोटे पत्थर खुद भी बनाए जाते हैं. अब कहीं इसे जनमानस अपनी आस्था से भी जोड़ रहा है।

 

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