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प्रदेश की पहली एचआरटीसी महिला चालक को मिला बस रूट

 

शिमला : “पंखों से कुछ नहीं होता हौंसलों से उड़ान होती है.” जी हाँ यह कहावत तो आपने सुनी होगी लेकिन इसे सच में साबित कर दिखाया है प्रदेश की पहली एच.आर.टी.सी. महिला चालक सीमा ठाकुर ने. सीमा का बस चलाने का अब सपना पूरा हो गया है।

मिला ओल्ड बस स्टैंड से कोर्ट कैम्पस चक्कर रूट

प्रदेश की पहली महिला बस चालक को इन दिनों एच.आर.टी.सी. प्रबंधन ने ओल्ड बस स्टैंड से कोर्ट कैंपस चक्कर का बस रूट दिया है। इन दिनों इस बस रूट पर वह बिना किसी हिचकिचाहट के बस का संचालन कर रही है। सीमा लंबे अरसे से एच.आर.टी.सी. प्रबंधन से बस चलाने की मांग कर रही थी। सीमा का कहना था कि उसने बस चलाने के लिए बकायदा टैस्ट दिया था और उनके पास हैवी लाइसैंस है।

 

नहीं दी जा रही थी बस

ऐसे मेंं उसे बस चलाने को दी जाए लेकिन एच.आर.टी.सी. प्रबंधन द्वारा बस नहीं दी जा रही थी लेकिन अब उसको बस चलाने का मौका दिया है। इससे पहले वह ओल्ड बस स्टैंड से सी.टी.ओ. तक एच.आर.टी.सी. टैक्सी चला रही थी। वर्ष, 2016 में सीमा ठाकुर ने एच.आर.टी.सी. में बस ड्राइवर की परीक्षा व बस ड्राइव टैस्ट पास किया था। इसके बाद उसे बस न देकर टैक्सी दी गई। 2 वर्षों तक लगातार गाड़ी चलाने के बाद उसे अब यह मौका दिया है।

पिता का सपना किया पूरा

सीमा ने बस चलाकर अपने स्व. पिता बलीराम ठाकुर का भी सपना पूरा किया है। उसके पिता भी हिमाचल पथ परिवहन निगम में बस चालक रहे हैं। उसके पिता का सपना था कि उनकी बेटी सीमा कुछ अलग करके दिखाए। इस पर सीमा ने फैसला लिया कि वह भी सरकारी बस चलाएगी और बेटियों को अपनी राह खुद बनाने के लिए प्रेरित भी करेगी।

अर्की निवासी है सीमा

जिला सोलन के अर्की की रहने वाली सीमा ठाकुर ने बस व गाड़ी चलाना अपने पापा से ही सीखा और हैवी लाइसैंस भी बनवाया। इसके बाद एच.आर.टी.सी. में बस ड्राइवर बनने के लिए आवेदन किया जिसमें उसने सफलता हासिल कर नौकरी पाई।

प्रबंधन और सरकार का जताया आभार

सीमा का कहना है एच.आर.टी.सी. ने उस पर विश्वास जता कर उसे बस चलाने का मौका दिया है। इसके लिए वह सरकार की आभारी भी रहेगी। उसने कहा कि बस चलाना उसका व उसके स्व. पिता का सपना था जो अब पूरा हो गया है। उसने बताया कि पिछले काफी समय से वह एच.आर.टी.सी. से बस चलाने की मांग कर रही थी।

वॉल्वो बस चलाना है सपना

इस बारे में कई बार निगम को पत्र भी लिखे थे लेकिन अब उसकी मांग पूरी हो गई है। उसने कहा कि हालांकि अभी भी वह अपने लक्ष्य से एक कदम दूर है और वह वोल्वो बस चलाना चाहती है और जल्द ही वह इस सपने को भी पूरा करेगी।

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