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90 प्रतिशत मरीज नहीं जानते हिमकेयर डिएक्टिवेट करवाना

डा. राजेंद्र प्रसाद राजकीय आयुर्विज्ञान चिकित्सा महाविद्यालय टांडा अस्पताल में फ्री स्वास्थ्य सेवा के लिए बने हिमकेयर या आयुष्मान कार्ड को डी-एक्टिवेट करने की अधिकतर मरीजों को जानकारी नहीं और न ही उन्हें कार्ड को इलाज के बाद डिएक्टिवेट करने के बारे बताया जाता है।

हिमकेयर स्वास्थ्य कार्ड

प्रदेश भर के सरकारी अस्पतालों में इलाज के समय या इलाज के बाद हिमकेयर या आयुष्मान हैल्थ कार्ड को एक्टिवेट या डिएक्टिवेट करना बहुत जटिल प्रक्रिया है। 90 प्रतिशत मरीजों को इलाज के बाद कार्ड को डिएक्टिवेट करना नहीं आता और न ही इसकी कोई जानकारी होती है।

अधिकतर अस्पतालों में मरीज को बीमारी के दौरान जैसे एमआरआई, सीटी स्कैन या अन्य टेस्टों के समय हिमकेयर या सीटी स्कैन को एक्टिवेट करने के लिए तो बता दिया जाता है, परंतु जब मरीज डिस्चार्ज होकर जाता है, तो उस समय मरीज को यह नहीं पता होता है कि कार्ड को डिएक्टिवेट भी करना होता है,

जिसकी वजह से मरीज भविष्य में इसका लाभ नहीं उठा पाता। भविष्य में कई बार तुरंत आपरेशन जैसी नौबत आन पड़ती है, तो उस समय मरीज़ को कहा जाता है कि हैल्थ कार्ड को डिएक्टिवेट करवा कर लाएं।

इस हालत में मरीज़ कई बार दूर स्थित अस्पताल में इलाज करवा रहा होता है, फिर उसे तुरंत पहले अस्पताल जहां से इलाज करवाया था, वहां जाकर हैल्थ कार्ड डिएक्टिवेट करवाना पड़ता है और यह प्रक्रिया इतनी सरल नहीं है कि एक दिन में हो जाए।

हैल्थ कार्ड को डिएक्टिवेट करने के लिए रिकार्ड रूम के स्टोर से डॉक्यूमेंट की फाइल को ढूंढना पड़ता है। साथ में दो साल से अगर सुरक्षित रखी होगी, तो एमआरआई या सीटी स्कैन की फिल्म को डॉक्यूमेंट की फाइल के साथ जमा करवाना पड़ता है, फिर जाकर हैल्थ कार्ड डिएक्टिवेट होगा और फिर अगले अस्पताल में वह हैल्थ कार्ड चलेगा।

अन्यथा फ्री सुविधा के लिए बने हिमकेयर व आयुष्मान कार्ड होने के बाबजूद कैश देकर इलाज करवाना पड़ेगा और कार्ड को एक्टिवेट करवाने के समय अगर आप के पास स्मार्ट फोन नहीं है, तो भी आप बिना फोटो खींचे कार्ड को एक्टिवेट नहीं करवा पाएंगे। फ्री सुविधा के लिए बने हिमकेयर व आयुष्मान कार्ड को एक्टिवेट और डिएक्टिवेट करवाने के लिए लंबी-लंबी लाइनों की लक्ष्मण रेखा को पार करना पड़ता है।

कई बार तो मरीज़ को स्टोर रूम डॉक्यूमेंट को ढूंढने के लिए घर से लोग लाने पड़ते हैं। सबसे ज्यादा बुजुर्ग और गर्भवती महिलाओं को इस समस्या का सामना करना पड़ता हैं और कई चक्कर काटने पड़ते हैं।

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