मंडी में स्क्रब टायफस के 4, जोगिन्दरनगर में पीलिया के 6 मरीज
मानसून के साथ ही मंडी में स्क्रब टायफस और पीलिया ने चिंता बढ़ा दी है। जोनल अस्पताल मंडी में हाल ही में स्क्रब टायफस के चार मरीजों की पुष्टि हुई है।
जिले के अन्य अस्पतालों में भी इस बीमारी के मामले सामने आ रहे हैं। वहीं जोगिन्दरनगर में पीलिया के छह मामले रिपोर्ट किए गए हैं। स्वास्थ्य विभाग और अस्पताल प्रशासन दोनों बीमारियों को लेकर अलर्ट मोड पर हैं।
चिगर के काटने से स्क्रब टायफस फैल रहा ता बरसात के गंदे पानी को पीने से पीलिया। स्क्रब टायफस मुख्य रूप से चिगर के काटने से होता है। चिगर छोटे घुन के लार्वा होते हैं, जो घास, झाडिय़ों, झाड़ीदार वनस्पति और खेतों में पाए जाते हैं। ये अक्सर चूहों और अन्य छोटे जानवरों पर पलते हैं।
संक्रमित चिगर जब किसी व्यक्ति को काटता है, तो उसके शरीर में ओरिएंटिया त्सुत्सुगामुशी नामक जीवाणु प्रवेश कर जाता है। सिर्फ लार्वा अवस्था वाले चिगर ही संक्रमण फैलाते हैं।
यह बीमारी व्यक्ति से व्यक्ति में सीधे नहीं फैलती। काटने के छह से 12 दिनों के अंदर तेज बुखार, सिरदर्द, शरीर में दर्द, ठंड लगना और कभी-कभी काटने वाली जगह पर काला पपड़ी जैसा घाव दिख सकता है।
समय पर इलाज न होने पर यह गंभीर रूप ले सकता है। डॉक्टर एंटीबायोटिक से इसका इलाज करते हैं। पीलिया आमतौर पर दूषित पानी या खाने से फैलता है।
बरसात में पानी के स्रोत दूषित होने का खतरा बढ़ जाता है, जिससे ऐसे मामले सामने आते हैं। मरीजों में पीलापन, थकान, भूख न लगना और पेट दर्द जैसे लक्षण देखे जा रहे हैं।
क्या बोले एमएस डाक्टर दिनेश ठाकुर
जोनल अस्पताल मंडी के एमएस डॉक्टर दिनेश ठाकुर का कहना है कि बरसात और उसके बाद की नमी में चिगर की संख्या तेजी से बढ़ती है। ग्रामीण इलाकों, खेतों और घास-झाड़ियों वाले क्षेत्रों में काम करने वाले लोग सबसे अधिक जोखिम में हैं।
तेज बुखार, शरीर में दर्द या पीलापन जैसे लक्षण नजर आने पर तुरंत नजदीकी अस्पताल पहुंचें और जांच करवाएं। दोनों बीमारियों का समय पर इलाज संभव है, लेकिन लापरवाही घातक साबित हो सकती है।
पीलिया में ऐसा करें
उबला या फिल्टर किया हुआ पानी ही पिएं।
सडक़ किनारे के कच्चे खाने-पीने से बचें।
व्यक्तिगत स्वच्छता का पूरा -पूरा ध्यान रखें।
स्क्रब टायफस से बचें
लंबी बाजू की कमीज और पतलून पहनें।
कीट-निरोधक क्रीम या स्प्रे का इस्तेमाल करें।
घास और झाडिय़ों वाले इलाकों में न बैठें और न सोएं। झाडिय़ां साफ रखें।








