औषधीय गुणों से भरपूर है दुनिया की ये सबसे महँगी सब्जी

जोगिन्दरनगर : आज तक आप लोगों ने 20 से 100 रुपए किलो तक की ही सब्जियां खाई होंगी. क्या आपने कभी 15000 रुपए किलो वाली सब्जी खाई है ?? इस सब्जी की अपनी ही खासियत है. तो आइये जानते हैं इस सब्जी की खासियत और फायदे :

प्राकृतिक रूप से निकलती है “गुच्छी”

गुच्छी नाम की यह सब्जी हिमाचल प्रदेश में बसंत ऋतु में प्राकृतिक रूप से जंगलों में मिलती है. यह सब्जी दुनिया की सबसे महंगी सब्जी के रूप में जानी जाती है. हिमाचल में इस सब्जी को कई नामों से पुकारा जाता है.

मार्कुला एक्सुलेंटा

हिमाचल प्रदेश के चेऊ किन्नौर में जांगनोच एक्सुलेंटा एक लैटिन शब्द है जिसका अर्थ होता है खाने योग्य. इस प्रकार गुच्छी का वैज्ञानिक नाम मार्कुला एक्सुलेंटा है.यह सब्जी फाइव स्टार होटलों में परोसी जानी वाली सब्जी है. यह सब्जी औषधीय गुणों से भरपूर है. ग्रामीण दूर दराज इलाकों में इसे औषधीय रूप में भी इस्तेमाल करते हैं.

18 से 21 डिग्री तापमान में उगती है गुच्छी

गुच्छी औसतन 2 से 7 सेंटीमीटर चौड़ी और 2 से 10 सेंटीमीटर लम्बी होती है. गुच्छी निम्न ऊंचाई पर सफेद रंग की पाई जाती है जबकि देवदार एवं अन्य ऊंचाई वाले क्षेत्रों में इसका रंग काला हो जाता है.

बादलों की गर्जन के साथ उगती है

पहाड़ी ग्रामीण लोगों की मान्यता है कि गुच्छी बादलों की गर्जना के साथ उगती है.सर्दियाँ खत्म होते ही गुच्छी हिमाचल प्रदेश, उतराखंड, कश्मीर और हिमालय के अन्य ऊंचे हिस्सों में मिलती है.

सेवन से नहीं होती दिल की बीमारी

गुच्छी में विटामीन बी, डी, सी और अन्य विटामीन की भरपूर मात्रा होती है. इसके नियमित सेवन से दिल की बीमारी नहीं होती.

प्राकृतिक मशरूम

गुच्छी प्राकृतिक रूप से पाया जाने वाला मशरूम है. इसका तना हल्का पीला व सफेद होता है.यह अंदर से खोखला और नरम होता है. गुच्छी की मांग सिर्फ भारत में ही नहीं बल्कि विदेशों में भी है.पाकिस्तान, अमरिका,यूरोप,फ़्रांस इटली और स्विट्ज़रलैंड जैसे देशों में गुच्छी की खासी मांग है.

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