चलाक लाड़ी कने स्याणा लाड़ा

इक जनानी थी पर थी बड़ी झगडालू. सबनी कने लड़दी रैहंदी थी. अपणीयां सासु जो ता सिरे गे नि सखांदी थी. गल्ला-गल्ला मंझ तिसा जो नीचा दिखाने रा मौका तोपदी रैहंदी थी. लाड़ा बचारा घराटा रे पट्टा मंझ पिसणे सान्ही पिसदा था. लाड़ीया जो भतेरा समझांदा था पर तिस्सा जो कोई फर्क नी पौंदा था.

इक दिन लाड़ीया रे पेटा पीड़ पेयी कने सै बमार होई गेई. बड़ा इलाज कराया पर मर्ज नि मिल्लो. मर्ज हुंदा ता मिलणा था. तिस्से ता बड़ी तगड़ी प्लान बणाई री थी.

प्लाना रे मताबक तिसे अपने ग्रांवां रा पंडत बुलाया कने तिन्ने लाड़े जो सलाह दिति जे भई लाड़ीया री सासु आपणे पैरा जो नीले कने मुंहा जो काले रंगा मंझ रंगी कने तिसा रे सामणे आणे रा टूणा करो ता सै ठीक होई सकहिं. लाड़े बड़ा सोच्या पर बचारे लाड़ीया रे गठे हाँ केरी दिति.

अच्छा जी टूणे करणे रा दिन आई गेया. सासु मुंह काला कने नीले पैरा केरी कने तिस्सा रे सामणे आई गयी. लाड़ी बड़ी भारी खुश होई. देख्या मिंजो कने पंगा लेने रा मजा? तिस्से शेयर करणे रे गठे फोटो फाटो खिंचे कने फेरी जुमला मारेया:

“देख्या जनानिया रा चाला, कराये न पैर निल्ले कने मुंह काला”

एतणीयां मंझ लाड़ा बोल्या.

“तू भी देख मरदा री फेरी.. मुईए देखि ता लै माँ मेरी कि तेरी!!”

मंडयाली

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