शिमला से कालका के बीच अक्तूबर में फिर दौड़ेगी टॉय ट्रेन

विश्व धरोहर शिमला-कालका रेलवे ट्रैक को दुरुस्त करने का कार्य तेजी से आगे बढ़ रहा है। अंबाला रेलवे मंडल के अधिकारियों ने ट्रैक को दुरुस्त करने का कार्य इसी माह के अंत में पूरा करने का लक्ष्य रखा है। हालांकि कालका व कोटी के बीच ट्रैक बहाल कर दिया है और ट्रेनें चलना शुरू हो गई हैं। अब अगले चरण में कालका व सोलन के बीच ट्रैक को बहाल किया जाएगा।

दुरुस्त हो रहा रेलवे ट्रैक

अगले सप्ताह कालका से सोलन के बीच ट्रेनें बहाल करने का लक्ष्य रखा गया है। बता दें कि 14 अगस्त को भारी बारिश व भूस्खलन के चलते यह ट्रैक समरहिल व जतोग के बीच 50 मीटर के करीब क्षतिग्रस्त हुआ था और इससे शिमला व सोलन के बीच बीते 19 जुलाई से जो विशेष ट्रेन चलाई जा रही थी वह भी बंद हो गई थी।

समरहिल व जतोग के बीच ट्रैक क्षतिग्रस्त होने के अलावा परवाणू तक यह ट्रैक जगह-जगह से क्षतिग्रस्त हुआ था। समरहिल व जतोग के बीच क्षतिग्रस्त हुए रेल ट्रैक को विशेष गार्डर लगाकर दुरुस्त किया जा रहा है।

समर हिल स्टेशन

सूने पड़े रेलवे स्टेशन
ट्रैक क्षतिग्रस्त होने से फिलहाल शिमला से सोलन व कोटी से पहले आने वाले सभी स्टेशन सूने पड़े हैं।

हालांकि सोलन व कालका के बीच ट्रैक दुरुस्त करने का कार्य अंतिम चरण में है लेकिन शिमला से सोलन के बीच ट्रैक दुरुस्त करने मेें अभी और समय लगेगा। हालांकि ट्रैक की मुरम्मत करने का लक्ष्य 30 सितम्बर रखा है।

पहली बार रेल ट्रैक पर ट्रेनों की आवाजाही हुई इस तरह प्रभावित
प्राकृतिक आपदा का असर पहली बार इस 120 वर्ष पुराने रेल ट्रैक पर पड़ा है। बीते 2 माह में रेल ट्रैक पर प्राकृतिक आपदा का इस तरह असर पड़ा है कि बार-बार ट्रैक अवरुद्ध हुआ है। इस कारण इस अवधि में नियमित रूप से ट्रेनों का संचालन नहीं हो पा रहा है।

विंटर सीजन के दौरान जब बर्फबारी का दौर शुरू होता है और बर्फ के कारण सभी सड़क मार्ग बंद हो जाते हैं तब शिमला-कालका रेललाइन एकमात्र सहारा होती है। भारी बर्फबारी के बावजूद यह रेललाइन बंद नहीं होती है।

95.68 किलोमीटर लंबी ऐतिहासिक लाइन को लोक यातायात के लिए 9 नवम्बर, 1903 को खोला गया था। 10 जुलाई, 2008 को इसे यूनैस्को ने विश्व धरोहर का दर्जा दिया। शिमला-कालका रेलमार्ग के इतिहास में शायद ही यह मार्ग कभी बंद हुआ हो।

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