त्रिवेणी की प्राचीन कुटिया हुई जर्जर

चौंतडा विकास खंड की मेन भरोला पंचायत के त्रिवेणी में स्थित सदियों पुराने धार्मिक स्थल पर खतरा मंडराने लगा है । इस स्थल के पुनरोधार के लिए अगर दानी सज्जनों का साथ नही मिला तो इस स्थल का नामोनिशान मिट सकता है । करीब 70 बर्षों तक ओघड बाबा जुलाई नाथ की तपोस्थली के रूप में जाना जाने वाला यह स्थल अपने अस्तित्व की लड़ाई लड़ रहा है । इस स्थल पर मौजूद अति प्राचीन कुटिया अब इस हालत में नही रही है की वह और सिद्ध पुरुष को अपने आगोश में शरण देकर उसे प्रभु चरणों में लीन होने को मौका दे पाए ।

यह कुटिया पूरी तरह जर्जर हो चुकी है तथा कभी भी गिर सकती है । हालाँकि मौजूदा समय में यहाँ पर एक ओघड बाबा भी साधना में लीन है लेकिन कुटिया की जर्जर हालत कभी भी खतरा पैदा कर सकती है । कुटिया के अंदर पानी टपकने के कारण यह बाबा पहले ही परेशान है । स्थानीय निवासी अविनाश ठाकुर ने बताया की वह अन्य लोगो के सहयोग से इस कुटिया के स्थान पर नई कुटिया बनाने की सोच रहे है । उन्होंने बताया की यहाँ एक कमेटी का निर्माण कर इस स्थान की प्रगति की और काम किया जाएगा । उन्होंने प्रशासन से भी मांग की है की वह इस कुटिया के पुननिर्माण के लिए उचित सहायता मुहैया करवाए ।

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