फिर से सवालों के घेरे में पठानकोट-मंडी फोरलेन परियोजना
पठानकोट-मंडी फोरलेन परियोजना एक बार फिर सवालों के घेरे में है। करोड़ों रुपए की लागत से तैयार हो रहे इस महत्त्वाकांक्षी प्रोजेक्ट में निर्माण कार्य की धीमी रफ्तार और घटिया गुणवत्ता अब खुलकर सामने आने लगी है।
हालात यह हैं कि परियोजना का काम अभी तक अधूरा पड़ा है और मौजूदा गति को देखते हुए इसके निर्धारित समय में पूरा होने की संभावना बेहद कम नजर आ रही है। दूसरी ओर जहां-जहां निर्माण हुआ है, वहां गुणवत्ता को लेकर गंभीर खामियां दिखाई देने लगी हैं।
61 मील सुरंग से लेकर ठानपुरी तक कई स्थानों पर सड़क किनारे बनाई गई रिटेनिंग वॉल कमजोर पड़ती दिखाई दे रही हैं। कई जगह पत्थर बाहर की ओर फूल चुके हैं।
बरसात शुरू होने से पहले ही यह स्थिति सामने आने से स्थानीय लोगों और वाहन चालकों में भारी चिंता है। लोगों का कहना है कि यदि अभी यह हालत है, तो भारी बारिश के दौरान कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है। वर्षों से लोग धूल, जाम और अव्यवस्थित यातायात की परेशानी झेल रहे हैं। कई स्थानों पर मशीनरी और श्रमिकों की संख्या कम है, जिससे साफ प्रतीत होता है कि निर्माण एजेंसियां समयसीमा को लेकर गंभीर नहीं हैं।
फोरलेन पर करोड़ों खर्च करने के बाद भी मजबूती नहीं
लोगों का कहना है कि करोड़ों रुपए खर्च होने के बावजूद यदि नई बनी संरचनाएं इतनी जल्दी कमजोर पडऩे लगे, तो यह केवल तकनीकी कमी नहीं बल्कि निर्माण कार्य की निगरानी और जवाबदेही पर भी बड़ा प्रश्न चिह्न है। आरोप हैं कि कई स्थानों पर मानकों से समझौता कर कार्य किया गया, जिसका खामियाजा अब लोगों को भुगतना पड़ सकता है। यदि समय रहते सुधारात्मक कदम नहीं उठाए गए, तो बरसात के दौरान भू-स्खलन व सडक़ धंसने से इनकार नहीं किया जा सकता।
बरसात से पहले दम तोडऩे लगे डंगे
सबसे बड़ा सवाल फोरलेन की गुणवत्ता को लेकर है, जिन रिटेनिंग वॉल का उद्देश्य पहाड़ों से होने वाले भू-स्खलन को रोकना और सडक़ को सुरक्षित बनाना था, वही डंगे बरसात से पहले जवाब देते नजर आ रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि पहाड़ी क्षेत्रों में इस प्रकार के निर्माण में मजबूत ड्रेनेज सिस्टम, उच्च गुणवत्ता सामग्री और तकनीकी मानकों का कड़ाई से पालन बेहद जरूरी होता है। डंगों के निर्माण में गुणवत्ता से ज्यादा खानापूर्ति पर ध्यान दिया गया।
लापरवाह एजेंसी-अफसरों पर कसे शिकंजा
स्थानीय लोगों और सामाजिक संगठनों ने प्रशासन से मांग की है कि परियोजना की गुणवत्ता की निष्पक्ष तकनीकी जांच करवाई जाए तथा संवेदनशील स्थलों पर तुरंत मरम्मत और सुदृढ़ीकरण कार्य शुरू किया जाए। लोगों ने मांग उठाई है कि निर्माण कार्य में हो रही देरी और गुणवत्ता में बरती गई लापरवाही के लिए जिम्मेदार अधिकारियों और एजेंसियों की जवाबदेही तय की जाए।
परौर से पद्धर तक फोरलेन की डीपीआर ही तैयार नहीं
पठानकोट-मंडी फोरलेन की सुस्त कार्यप्रणाली का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि परौर से पद्धर तक 80 किलोमीटर हिस्से की डीपीआर तक अभी तैयार नहीं हो पाई है। यह मार्ग सामारिक दृष्टि से अत्यंत महत्त्वपूर्ण माना जाता है और सेना की आवाजाही के लिए भी सबसे उपयोगी मार्गों में शामिल है।
लोगों का कहना है कि जब अब तक डीपीआर ही तैयार नहीं हो पा रही है, तो निर्माण कार्य समय पर पूरा होने की उम्मीद करना भी बेमानी लगता है। करोड़ों रुपए की परियोजना होने के बावजूद काम की धीमी गति, अधूरा निर्माण और गुणवत्ता पर गंभीर प्रश्नचिन्ह लगा रहे है।





