डॉक्टरी केवल पेशा नहीं, मानवता की सेवा का संकल्प : राष्ट्रपति

हिमाचल प्रदेश के बिलासपुर में स्थित अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) के प्रथम दीक्षांत समारोह में मंगलवार को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने प्रथम बैच के स्नातक विद्यार्थियों को उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएं दीं।

राष्ट्रपति ने कहा कि एम्स बिलासपुर से चिकित्सा शिक्षा प्राप्त कर निकल रहे युवा चिकित्सकों पर केवल एक डिग्री की नहीं, बल्कि समाज और राष्ट्र के प्रति बड़ी जिम्मेदारी भी है।

उन्होंने विद्यार्थियों से आह्वान किया कि वे ज्ञान, कौशल के साथ संवेदना और करुणा को अपने चिकित्सकीय जीवन का आधार बनाएं तथा दूरदराज और जरूरतमंद लोगों तक स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाने को प्राथमिकता दें।

राष्ट्रपति ने कहा कि एम्स बिलासपुर के पहले स्नातक इस संस्थान की पहचान और विरासत की नींव रखने वाली पहली पीढ़ी हैं। आने वाले विद्यार्थी इन्हीं के कार्यों और आचरण से प्रेरणा लेंगे।

इसलिए उनका व्यवहार, मेहनत, प्रतिबद्धता और सेवा भावना एम्स की प्रतिष्ठा को नई ऊंचाइयां देने वाली होनी चाहिए। उन्होंने स्वर्ण पदक प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों के साथ-साथ उनके माता-पिता, अभिभावकों और शिक्षकों को भी बधाई दी।

मरीज सिर्फ केस नहीं, परिवार की उम्मीद और विश्वास

राष्ट्रपति ने चिकित्सा पेशे की संवेदनशीलता पर जोर देते हुए कहा कि मरीज जब डॉक्टर के पास आता है तो वह बीमारी के साथ डर और अनिश्चितता भी लेकर आता है। उसके परिवार की उम्मीद डॉक्टर से जुड़ी होती है।

चिकित्सक का ज्ञान बीमारी की पहचान करता है, कौशल उसका उपचार करता है, लेकिन संवेदनशीलता और करुणापूर्ण व्यवहार मरीज को हिम्मत देता है। इसलिए डॉक्टरों को अपने पेशे में श्रेष्ठ बनने के साथ-साथ मानवीय संवेदनाओं को भी सर्वोच्च स्थान देना चाहिए।

उन्होंने विद्यार्थियों से कहा कि वे अपने करियर की ऊंचाइयों पर पहुंचने के बाद भी उन लोगों को न भूलें, जिनके पास संसाधनों की कमी है। विशेषकर पहाड़ी और दूरदराज क्षेत्रों में विशेषज्ञ स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाना बड़ी चुनौती है। उन्होंने उम्मीद जताई कि एम्स बिलासपुर के युवा चिकित्सक जरूरतमंद क्षेत्रों में सेवा के लिए आगे आएंगे।

एम्स बिलासपुर को दूरदराज क्षेत्रों के लिए टेलीमेडिसिन का मजबूत केंद्र बनाने पर जोर

राष्ट्रपति ने कहा कि एम्स बिलासपुर की भौगोलिक स्थिति को देखते हुए इसकी जिम्मेदारी और भी बढ़ जाती है। हिमाचल के दुर्गम पहाड़ी क्षेत्रों में रहने वाली आबादी तक समय पर गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाना चुनौतीपूर्ण है।

ऐसे में एम्स को टेलीमेडिसिन, विशेषज्ञ परामर्श, स्वास्थ्यकर्मियों के प्रशिक्षण और आधुनिक तकनीक के माध्यम से दूरदराज क्षेत्रों की स्वास्थ्य व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में आगे बढऩा चाहिए।

उन्होंने कहा कि एम्स जैसी संस्थाओं के लिए सस्ती, सुलभ और प्रभावी स्वास्थ्य सेवाओं के समाधान विकसित करना चुनौती भी है और अवसर भी। आधुनिक चिकित्सा उपकरणों और दवाओं की बढ़ती कीमतों के बीच गरीब और मध्यम वर्गीय परिवारों को राहत पहुंचाना जरूरी है।

एम्स में तीन साल में 12 लाख से अधिक ओपीडी, एक लाख से ज्यादा आईपीडी का उल्लेख

राष्ट्रपति ने कहा कि उन्हें बताया गया है कि एम्स बिलासपुर में पिछले करीब तीन वर्षों में 12 लाख से अधिक आउट पेशेंट और एक लाख से अधिक इन-पेशेंट चिकित्सा सेवाओं का लाभ उठा चुके हैं।

उन्होंने इसे संस्थान की बढ़ती भूमिका का संकेत बताते हुए कहा कि इतने कम समय में एम्स बिलासपुर ने स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में महत्वपूर्ण स्थान बनाया है। उन्होंने उम्मीद जताई कि संस्थान आने वाले समय में हिमाचल के साथ-साथ पड़ोसी राज्यों के लोगों को भी बेहतर चिकित्सा सेवाएं उपलब्ध करवाएगा।

आयुष्मान भारत का लाभ जरूरतमंदों तक पहुंचाने का आह्वान

राष्ट्रपति ने कहा कि गंभीर बीमारी का इलाज गरीब परिवारों के लिए बड़ी आर्थिक चुनौती बन सकता है और कई बार परिवारों को अपनी जमीन-जायदाद तक बेचनी पड़ती है। ऐसे में आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना जैसी स्वास्थ्य सुरक्षा योजनाओं की जानकारी जरूरतमंद लोगों तक पहुंचाना जरूरी है। उन्होंने कहा कि पात्र परिवारों को मिलने वाली स्वास्थ्य सुरक्षा का लाभ अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचे, इसके लिए जागरूकता बढ़ाई जानी चाहिए।

‘लाइफ लॉन्ग लर्नर बने रहें, रिसर्च को इनोवेशन में बदलें

नए चिकित्सकों को संदेश देते हुए राष्ट्रपति ने कहा कि चिकित्सा विज्ञान, तकनीक और स्वास्थ्य सेवाओं का स्वरूप तेजी से बदल रहा है। आने वाले समय में परिवर्तन की गति और तेज होगी।

ऐसे में चिकित्सकों को जीवनभर सीखते रहने वाला विद्यार्थी यानी लाइफ लॉन्ग लर्नर बने रहना होगा। उन्होंने विद्यार्थियों से शोध को केवल शोध तक सीमित न रखने, बल्कि उसे इनोवेशन में बदलकर लोगों के जीवन को बेहतर बनाने की दिशा में काम करने का आह्वान किया।

उन्होंने कहा कि ज्ञान की सार्थकता तभी है, जब उसे समाज के कल्याण के लिए साझा किया जाए और उसका उपयोग लोगों के जीवन को बेहतर बनाने में हो।

एम्स जैसे प्रतिष्ठित संस्थान से शिक्षा प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों से देश और समाज को बहुत उम्मीदें हैं। उन्होंने कहा कि विद्यार्थी अपने कार्यों से एम्स के ब्रांड को मजबूत करें और देश तथा मानवता की सेवा करें।

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