पैराग्लाइडिंग के लिए विश्व विख्यात घाटी में मूलभूत सुविधाओं का अभाव

बीड़-बिलिंग : पैराग्लाइडिंग के लिए विश्व विख्यात घाटी बिलिंग जहां विश्व के मानचित्र पर छाई है, तथा आजकल सैंकड़ों पर्यटक बिलिंग का लुफ्त उठाने के लिए पहुंच रहे हैं। मगर हैरानी इस बात की है कि पर्यटकों को न तो पीने के लिए एक बूंद पानी की मिल रही है, न ही शौचालय की सुविधा है।

जिसके कारण पर्यटकों में खासकर महिलाओं को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। यहां तक कि अब वही पर्यटक महिलाएं सोशल मीडिया पर भी खुल कर अपने विचार प्रकट कर प्रशासन को कोस रही हैं। पर्यटकों का तर्क है कि पहले तो बिलिंग जाने के लिए प्रशासन द्वारा लगाए बैरियर पर बाहरी गाडिय़ों से 100 रुपए प्रति गाड़ी के देने पड़ते हैं।

बाद में टेंडम उड़ान करवाने वाले पायलट से 75 रुपए प्रति उड़ान के लिए जाते हैं। ऐसे में पर्यटन विभाग के दावे हैं कि बिलिंग में पानी पहुंचाने के लिए दो करोड़ रुपए खर्च किए जा रहे हैं। पर्यटन विभाग का यह भी दावा है कि सरकार की नई मंजिल नई राहें के तहत भी करोड़ों रुपए खर्च होंगे। मगर आज तक यह पता नहीं चल पाया की वह घन राशि का क्या बना, धरातल पर तो कुछ भी दिखाई नहीं दे रहा है। बिलिंग पहुंचने वाले पर्यटकों को न तो पीने का पानी मिल रहा है। न ही के शौचालय की सुविधा।

शौचालय का निर्माण वर्षों से हो रहा है, वह भी अधर में लटका पड़ा है। अगर वे निर्माण पूरा भी हो जाए तो बिना पानी के वह शौचालय किस काम के, नल तो लगे हैं, मगर वह शोपीस बन चुके हैं, जिनसे पानी की एक बूंद नहीं टपकती। सरकार द्वारा नई मंजिल नई राहें के तहत बिलिंग में पानी पहुंचाने के लिए दो करोड़ के करीब की राशि उपलब्ध करवाई है, जिनमें से कुछ राशि जल शक्ति विभाग को दे दी गई है।

वहीं से बीड़, चौगान, क्योर, सूजा की पंचायतों के हजारों ग्रामीणों के लिए पानी का मुख्य स्रोत है। गर्मियों में वैसे ही वह जल स्त्रोत सूख जाते हैं। ऐसे में चारों पंचायतों में पीने के पानी की हाहाकार मच जाती है । अगर विभाग ने वहां से पानी बिलिंग के लिए उठाया तो इन चारों पंचायतों के लिये समस्या खड़ी हो जाएगी, जो यहां की जनता सहन नहीं करेगी।

उन्होंने जल शक्ति विभाग से कहा है कि पहले भी राजगूंधा से बिलिंग से पानी लाया जाता था। अब भी वहां से पानी उठाने की प्रपोजल बनाई जाए। अगर बिभाग ने फिर भी मनमानी की तो मजबूरन जनता को आंदोलन करना पड़ेगा। अब ऐसे में बिलिंग पहुंच रहे पर्यटकों को न जाने कितने दिनों तक इस मूलभूत समस्याओं से जूझ ना पड़ेगा।

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