दो मार्च को होगी पंचायतों की फाइनल डिलिमिटेशन

पंचायतों की फाइनल डिलिमिटेशन दो मार्च को कर दी जाएगी। पंचातयों के प्रस्ताव के बाद 27 फरवरी तक आपत्तियां दर्ज कराने की अवधि 27 फरवरी को पूरी हो गई है। इसके बाद अब दो मार्च को पंचायतों की फाइनल डीलिमिटेशन की जाएगी।

दो मार्च को अंतिम प्रकाशन के बाद 10 दिनों का अपील का समय दिया जाएगा, जो 11 मार्च तक रहेगा। अपीलों की सुनवाई मंडलीय आयुक्त द्वारा सात दिनों के भीतर की जाएगी और उनके निर्णय के अनुसार 20 मार्च तक संशोधित अंतिम प्रकाशन जारी करना होगा।

प्रदेश सरकार ने डिलिमिटेशन और आरक्षण रोस्टर की प्रक्रिया 31 मार्च तक पूरी करने के आदेश जारी किए हंै। पंचायतीराज विभाग ने सभी जिलों के डीसी को इस संदर्भ में पत्र जारी किया है।

इसके बाद आठ सप्ताह के भीतर यानी 31 मई तक चुनाव कराना अनिवार्य होगा। पत्र में यह भी स्पष्ट किया गया कि ब्लॉकों के पुनर्गठन और नई ग्राम पंचायतों के गठन से संबंधित लंबित डिलिमिटेशन कार्य भी 20 मार्च तक पूरे किए जाएं।

सभी अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि वे निर्धारित समयमें में प्रक्रिया पूर्ण कर इसकी सूचना विभाग को दें। सभी जिलों के डीसी को अब जिला परिषद वार्ड, पंचायत समिति, ग्राम पंचायत (जहां पहले नहीं हुई) के वार्ड का डिलिमिटेशन इस शेड्यूल के हिसाब से करना होगा।

यदि कहीं नई पंचायतें बननी हैं, तो उनका गठन 20 मार्च से पहले करना होगा। निर्वाचन क्षेत्रों का अंतिम आरक्षण 31 मार्च तक हर हाल में पूरा करना अनिवार्य किया गया है।

31 जनवरी को पूरा हो चुका है पंचायतों को कार्यकाल

पंचायती राज विभाग के निदेशक राघव शर्मा ने इस बारे निर्देश जारी किए हैं। पंचायतीराज विभाग की ओर से जारी पत्र के अनुसार जिन जिलों में वार्डों का परिसीमन और आरक्षण अभी अंतिम रूप में तय नहीं हुआ है, वहां निर्धारित शेडयूल के अनुसार कार्रवाई करनी होगी।

गौर हो कि प्रदेश की 3586 पंचायतों समेत 73 नगर निकायों में चुनाव होने हंै। हालांकि पंचायतों के जन प्रतिनिधियों का पांच साल का कार्यकाल बीते 31 जनवरी को पूरा हो चुका है।

इसके बाद सरकार ने पंचायतों में प्रशासक लगा रखे है। इसी तरह 47 नगर निकायों में भी सरकार प्रतिनिधियों का कार्यकाल समाप्त होने के बाद प्रशासक लगा चुकी है।

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