ओपीएस पर कर्मचारियों का विधानसभा पर हल्ला बोल

शिमला : ओल्ड पेंशन को बहाल करने की मांग को लेकर न्यू पेंशन स्कीम कर्मचारी महासंघ के घेराव के कारण राजधानी शिमला को पूरा दिन जाम रखा। एक ओर विधानसभा के भीतर सरकार और विपक्ष में कर्मचारियों के मामलों पर खूब तनातनी हुई, दूसरी ओर पुलिस के बैरिकेड तोड़ते हुए कर्मचारी विधानसभा गेट तक पहुंच गए। वे गेट पर रात काटने के बाद शुक्रवार को बजट का इंतजार करने की जिद में थे, लेकिन आखिरकार पुलिस ने रात करीब साढ़े नौ बजे विधानसभा गेट के बाहर से उन्हें हटा दिया।

कर्मचारियों पर पानी की बौछार करती पुलिस

 

 

 

 

कर्मचारियों को हटाते समय पुलिस कर्मचारियों व एनपीएस कर्मचारियों के बीच हल्की बहस व धक्कामुक्की भी हुई, लेकिन पुलिस उन्हें हटाने में सफल रही। हालांकि इस कारण मंत्रियों और विधायकों को पिछले गेट से ही निकलना पड़ा। धर्मशाला में हुए विधानसभा के शीतकालीन सत्र में विधानसभा के गेट पर आकर धरना देने की घटना को शिमला में दोहरा दिया गया है।

यह कारनामा किया न्यू पेंशन स्कीम कर्मचारी संघ ने, जिसे सरकार ने हल्के में आंका था। शिमला विधानसभा के बाहर एनपीएस कर्मचारी महासंघ ने धरना दिया और जिद की कि सीएम उनसे आकर बात करें। इससे पहले बात करने आए शहरी विकास मंत्री सुरेश भारद्वाज, मुख्य सचिव रामसुभग सिंह, डीजीपी संजय कुंडू आदि को बैरंग लौटा दिया गया। कर्मचारी न तो पुलिस के डंडों से डरे, न ही ठंडे पानी की बौछारों से। पुलिस के साथ पहले टूटीकंडी, फिर 103 और फिर विधानसभा के पास कर्मचारियों की झड़प हुई।

103 पर पुलिस वालों से धक्कामुक्की के बाद कर्मचारियों ने बैरिकेड तोड़े और पुलिस ने वाटर कैनन शुरू होते ही टैंकर के पाइप निकाल दिए। इसके बाद कर्मचारी सड़क से ही सीधे विधानसभा पहुंचे और वहां भी बैरिकेड तोड़ने के बाद गेट पर धरना दे दिया।

यहां इनसे बात करने पहले डीसी शिमला आदित्य नेगी अपनी प्रशासनिक टीम के साथ आए। फिर डीजीपी संजय कुंडू ने इन्हें समझाने की कोशिश की। विधानसभा में ही कैबिनेट की बैठक चल रही थी। इस बैठक के बाद शहरी विकास मंत्री एवं स्थानीय विधायक सुरेश भरद्वाज इनसे मिलने आए, लेकिन इनकी बात भी कर्मचारियों ने नहीं सुनी। इन्हांेने शर्त रखी है कि सीएम बाहर आकर ओल्ड पेंशन को लेकर ऐलान करें।

एनपीएस कर्मचारी महासंघ के अध्यक्ष प्रदीप ठाकुर और महासचिव भरत शर्मा ने कहा कि प्रदर्शन में प्रदेशभर से कर्मचारी और रिटायर कर्मचारी आए हैं। सरकार ने कर्मचारियों को डरा धमकाकर रोकने का प्रयास किया। गुरुवार की रात यहां पर रुकेंगे, क्योंकि हम यही मांग कर रहे हैं कि मुख्यमंत्री हमसे वार्ता करें।

अगर ओल्ड पेंशन लागू नहीं भी करनी है, तो भी यहां आए हुए कर्मचारियों के समक्ष मुख्यमंत्री यह बात कहें। मुख्यमंत्री नेक दिल इनसान हैं, लेकिन उनके सलाहकार हमारे आंदोलन के बारे में गलत फीड बैक दे रहे हैं। नेशनल मूवमेंट ऑफ ओल्ड पेंशन स्कीम के राष्ट्रीय अध्यक्ष विजय कुमार बंधु भी इस दौरान मौजूद थे।

हिमाचल प्रदेश शिक्षक महासंघ ओपीएस की बहाली चाहता है, लेकिन इसके लिए धरना-प्रदर्शन का समर्थन नहीं करता। ओपीएस की बहाली के लिए वार्तालाप ही सही तरीका है। यह बात हिमाचल प्रदेश शिक्षक महासंघ के प्रांत महामंत्री डा. मामराज पुंडीर ने कही। डा. मामराज ने कहा कि प्रदेश में कुछ नेता इस धरने-प्रदर्शन से राजनीतिक रोटियां सेंकने में लगे हैं। पूर्व सरकार द्वारा 2003 में प्रदेश के कर्मचारियों से पेंशन छीनी और अब बहाल करने की बात कर रहे हैं।

मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने कहा कि अब तक के चार साल में कर्मचारियों की हर मांग को लेकर सरकार ने विचार किया। कोविड में भी कोई वेतन-पेंशन नहीं रोकी। विधानसभा में साफ कर दिया है कि कमेटी एग्जामिन करेगी, फिर समाधान निकालेंगे।

कर्मचारियों को बात करने के लिए बुलाया गया, लेकिन बात करने के बजाए सड़कें जाम की गईं, पुलिस के साथ धक्कामुक्की की। न भूलें कि आप कर्मचारी हैं। जिस भाषा में कुछ लोग बात कर रहे हैं, वह उचित नहीं है। जब सरकार बात सुनने को मौजूद है तो वे शर्तें तय न करें। ये लोग राजनीतिक दृष्टि से खिलौना बनने की कोशिश कर रहे हैं। यह सही नहीं है। पुलिस ने पूरे मामले में सब्र के साथ काम किया है।

कर्मचारियों के मसले पर एक ओर जहां कर्मचारियों की प्रदर्शन चल रहा था, तो वहीं सदन में मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर व नेता प्रतिपक्ष मुकेश अग्निहोत्री के बीच तीखी बहस हुई। मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने कहा कि कांग्रेस कर्मचारियों को सरकार के खिलाफ उकसा रही है।

आप लोग ही इसके लिए जिम्मेदार है। आप लोगों की पैदा की हुई स्थिति है। मुकेश अग्निहोत्री को राजनीतिक भूख है। वहीं नेता प्रतिपक्ष मुकेश अग्निहोत्री ने कहा कि सरकार कर्मचारियों का दमन कर रही है। कर्मचारियों पर बल प्रयोग किया जा रहा है। खुदा के लिए ऐसा मत कीजिए।

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