इंतकाल, तकसीम और बंदोबस्त में देरी होने पर होगी कार्रवाई

हिमाचल में अब रेवेन्यू मामलों में देरी और बहाने बाजी नहीं चलेगी। राज्य सरकार ने 69 साल के बाद हिमाचल प्रदेश भू राजस्व एक्ट में बदलाव करने का बिल शनिवार को विधानसभा से विपक्ष के विरोध के बावजूद पारित करवा लिया।

अब राज्यपाल की मंजूरी के बाद यह लागू हो जाएगा। हिमाचल में पहली बार हुआ है कि रजिस्ट्री इंतकाल, तकसीम से लेकर बंदोबस्त तक के लिए डेडलाइन तय हो गई है।

राजस्व मंत्री जगत सिंह नेगी ने विधानसभा में भू राजस्व अधिनियम संशोधन विधेयक रखा। इस बिल के जरिए भू राजस्व अधिनियम 1954 में 69 साल बाद परिवर्तन किया जा रहा है।

इसका मुख्य उद्देश्य राजस्व मामलों का समयबद्ध निपटारा है। अब कोई भी राजस्व अधिकारी टालमटोल नहीं कर सकेगा और लापरवाही पर अनुशासनात्मक कार्रवाई भी होगी। इस संशोधन के जरिये राजस्व मामलों में व्यक्तिगत तौर पर घर पर नोटिस देना जरूरी नहीं होगा।

इसके लिए इलेक्ट्रॉनिक माध्यम भी मान्य होंगे। यानी ईमेल, एसएमएस और व्हाट्सएप के जरिए भी समन की तामील हो सकेगी। इससे समय की बचत होगी।

यदि डीमार्केशन यानी निशानदेही का मामला है, तो संबंधित रेवेन्यू अफसर को 3 महीने में फैसला देना होगा। पार्टीशन यानी तक्सीम के लिए 6 महीने और 3 महीने मिलाकर कुल 9 महीने का समय रखा गया है।

यदि ये मामले समय पर नहीं निपटाए तो रेवेन्यू अफसर को देरी का कारण लिखित में बताना होगा। तय अवधि में यह काम न होने पर अपने से ऊपर के अधिकारी को इसकी सूचना देनी पड़ेगी।

यदि यह सूचना लिखित में नहीं दी होगी, तो संबंधित रेवेन्यू अफसर के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई का प्रावधान कानून में पहली बार जोड़ा गया है।

राजस्व केस की हर अपील को 4 महीने के भीतर निपटना होगा।
मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने कहा कि 69 वर्षों बाद सरकार इस एक्ट में महत्वपूर्ण संशोधन कर रही है। इसके लिए 6 बैठकें विभाग ने की हैं।

2 बैठकों में मैने भी भाग लिया है। इस बदलाव से पंजीकरण, म्यूटेशन, डिमार्केशन और पार्टिशन के मामलों का जल्द निपटारा होगा, अन्यथा यह व्यवस्था ऐसे ही चलती रहेगी।

उन्होंने कहा कि प्रदेश में पटवारियों और अन्य राजस्व अधिकारियों के खाली पदों को भी सरकार भरेगी। इससे पहले राजस्व मंत्री जगत सिंह नेगी ने कहा की प्रदेश में कई वर्षों से डिमार्केशन के 27 हजार केस लंबित हैं।

पार्टिशन के 25 हजार केस लंबित हैं। उन्होंने कहा कि हम इस मामले में बदलाव चाहते हैं। राजस्व अधिकारियों के फैसले पर कोई सवाल नहीं उठा रहे हैं। उनके समय पर काम न करने को लेकर यह बिल है।

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