फोरलेन एलाइनमेंट का सच: व्यापारियों की चिंता या जनता की सुरक्षा?
अभी शुक्रवार को भूस्खलन होने के कारण गुम्मा के पास एक महिला की मौत और सात लोग घायल हो गए. गाड़ी में सवार सभी लोग लड भड़ोल के प्रसिद्ध सिमसा माता मंदिर जा रहे थे और इस बीच रास्ते में हादसे का शिकार हो गए.
एक तरफ जहाँ, जोगिन्दर नगर शहर, हराबाग, घटासनी आदि के लोग फोरलेन एलाइनमेंट के लिए लामबंदी कर रहे हैं और आंदोलन का डर दिखा रहे हैं गुम्मा में हुआ यह हादसा दिखता है कि यह पूरा क्षेत्र शुरू से ही असुरक्षित और जोखिम भरा रहा है ।
दोहराया जा रहा है यह पैटर्न ⚠️
चाहे वह छाणग का बस हादसा रहा हो या कोटरोपी का कभी न भूलने वाला हादसा, जिसमें 49 लोगों की मौत हो गयी थी, और अब गुम्मा का यह हादसा, बार बार हमें याद दिला रहे हैं कि यदि फोरलेन यहाँ से निकला तो इसके खतरनाक और दूरगामी परिणाम हो सकते हैं.
दो अलाइनमेंट, दो विकल्प
अलाइनमेंट (1) = पुराना रोड (आहजू → चौंतड़ा → जोगिन्दर नगर → हरबाग → गम्मा → घटासनी)
अलाइनमेंट (2) = नया प्रस्तावित रोड (आह्जू → सैंथल → बालकरूपी → बनाई → खुद्दर → मच्छयाल)
अलाइनमेंट (1) की 2 मुख्य समस्याएं
पहला, यह कि, भू स्खलन से यहाँ पर बनने वाली अधिकतर रोड के हिस्सों, पिल्लरों, पुलों और डंगों को बार बार टूटने पर हर साल फिर से बार बार बनाना होगा, जैसा कि कुल्लू मनाली के कई हिस्सों में होता है. इससे धन और समय का अनावश्यक व्यय होगा।
दूसरा, इससे निर्माण कार्य साल के अधिकतर समय चलता रहने से यहाँ से आवागमन साल के अधिकतर समय ही बाधित रहेगा, जिससे फोरलेन को बनाने के पीछे का मूल उद्देश्य ही विफल हो जायेगा।
क्या लोगों की सुविधा और जान से ज्यादा जरूरी है यहाँ से फोरलेन?
हर बरसात में इतना सब कुछ होने के बाद भी पता नहीं क्यों इन स्थानों के लोग फोरलेन अलाइनमेंट (1 ) निकालने के लिए मांग पर अड़े हैं. और आंदोलन पर आमादा हैं. देखा जाए तो यह रोड़ फोरलेन तो क्या टू लेन के लिए भी सुरक्षित नहीं है. क्या यहाँ से फोरलेन की अलाइनमेंट लाखों लोगों के लिए बेरोक-टोक सुविधा और उनकी जान माल से जरूरी है?
लोगों को समझनी होगी वस्तुस्थिति
क्या सिर्फ व्यापार की चिंता है? 🏪
दरअसल, अलाइनमेंट (1) पर पड़ने वाले निवासी अपने बिज़नेस 💼 के बारे में ज्यादा चिंतित लगते हैं। या फिर वह अपनी संपत्ति के संभावित मूल्य 💰 को लेकर चिंतित हैं।
लेकिन सवाल यह है: यहाँ पर कितने व्यवसाय हाई-वे पर चलने वाली लॉन्ग रूट की गाड़ियों के दम पर चल रहे हैं? शायद बहुत ही कम! 🤷
यहाँ के ज्यादातर व्यवसाय लोकल जनसांख्यिकी पर आधारित हैं। 👥 साथ ही लोकल ट्रैफिक भी यहाँ की आर्थिकी को सपोर्ट करते हैं। इन सब पर फोरलेन कहीं से भी बने, इससे कोई फर्क नहीं पड़ेगा।
अब जोगिन्दर नगर शहर को ले लीजिये। क्या फोरलेन बनने से स्थानीय ग्राहक संख्या और वस्तुओं की मांग में कोई अंतर आएगा? 📊 बिलकुल नहीं! ❌
क्या अलाइनमेंट (2) से अधिक लोगों को रोजगार नहीं मिलेगा?
अलाइनमेंट (2) = अधिक रोजगार 💼✨
अलाइनमेंट (1) के तहत फोरलेन बनने से मौजूदा व्यवसाय ही मजबूत होंगे, जबकि अलाइनमेंट (2) बनने से नए व्यवसाय खड़े होंगे! 🏗️ जिससे हज़ारों लोगों को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार मिलेगा। 👷♂️👷♀️
फोरलेन अलाइनमेंट (2) के तहत फोरलेन आह्जू, सैंथल, बालकरूपी, बनाई, खुद्दर, मच्छयाल आदि जगहों से निकलने से सैंकड़ो परिवार लाभान्वित होंगे और आर्थिकी मजबूत होगी। फोरलेन के तहत लोगों की सम्पति और जमीन का मूल्य बढ़ेगा जिससे लोग बेहतर जीवन-यापन कर सकेंगे। क्या उपरले लोगों को इससे कोई परेशानी या निराशा होगी।
फोरलेन अलाइनमेंट (2) के तहत:
- सैंकड़ो परिवार लाभान्वित होंगे 😊
- आर्थिकी मजबूत होगी 💪
- संपत्ति और जमीन का मूल्य बढ़ेगा 📈
- लोग बेहतर जीवन-यापन कर सकेंगे 🏡
अलाइनमेंट (1) में कोई नुकसान नहीं? 🤨
अलाइनमेंट (1) के तहत फोरलेन नहीं बनने से यहाँ के व्यवसाय पर कोई असर नहीं पड़ेगा, यदि पड़ेगा भी तो बहुत कम. जमीन और सम्पति की कीमतें शायद ज्यादा नहीं बढ़ेंगीं लेकिन कम भी नहीं होंगी। बरोट हर साल की तरह पर्यटक को लाता रहेगा तो लोकल व्यवसाय को कोई हानि भी नहीं होगी।
- जमीन और संपत्ति की कीमतें शायद ज्यादा नहीं बढ़ेंगी ⚖️
- वर्तमान हाई-वे बंद नहीं होगी 🛣️
- पर्यटक वैसे ही आते रहेंगे 🚗
- लोकल व्यवसाय को कोई हानि नहीं होगी 🏪
भूभू जोत टनल प्रोजेक्ट 🚇
यदि आने वाले समय में भूभू जोत टनल का प्रोजेक्ट सिरे चढ़ा 🎯 तो बाकी सभी समस्याएं स्वयं ही हल हो जाएंगी! ✅
तथाकथित ‘फोरलेन संघर्ष समिति’ के अनुसार, “मूल अलाइनमेंट से 40 से ज़्यादा पंचायतों को फ़ायदा होने की उम्मीद थी जबकि नए अलाइनमेंट से सिर्फ़ छह पंचायतों को फ़ायदा होने का अनुमान है”. वैसे तो इस में कोई तथ्य नज़र नहीं आता लेकिन यदि यह थोड़ा बहुत भी आस पास है तो यह कथन ही अलाइनमेंट(2) की उपयोगिता अलाइनमेंट(1) की अनुपयोगिता सिद्ध करने के लिए काफी है. काम पंचायतों का मतलब हुआ, सीधा रोड, कम दूरी और कम ट्रेवल टाइम।
‘फोरलेन संघर्ष समिति’ के हास्यास्पद कारण
जैसा कि ‘फोर लेन संघर्ष समिति’ ने पुराने रूट को ही बनाए रखने के लिए कारण गिनाएं हैं उनमें वे इसकी सुरक्षा, लागत और जन-उपयोगिता पर सवाल उठा रहे हैं।
समिति ने पुराने रूट के लिए तीन कारण दिए:
- “सुरक्षा” – हास्यास्पद! 😆
- “लागत” – (₹700 बनाम ₹2,200 करोड़) – विवादास्पद! 💸
- “जन-उपयोगिता” – सीमित दृष्टिकोण! 🙈
“सुरक्षा” कारण जहाँ हास्यास्पद है ही वहीँ लागत को एक कारण के रूप में गिनना भी समिति के पास अपनी मांग के औचित्य को सिद्ध करने के कारणों की कमी को दर्शाने के लिए काफी है।
वैसे तो उनके द्वारा सुझाया गया ₹700 बनाम ₹2,200 करोड़ डिबेट का विषय है, तो भी क्या एक “सामरिक महत्व” के राष्ट्रीय राज मार्ग के निर्माण के लिए कुछ सौ करोड़ महत्व रखता है? दूसरे, पुराने रोड के साथ साथ वही पुरानी समस्याएं जारी रहेंगी, रोड के हिस्सों, पिल्लरों, पुलों और डंगों को बार बार टूटने पर हर साल फिर से बनाने पर होने वाला भारी रख रखाव का खर्चा(maintenance cost)
रही बात जन उपयोगिता की तो उन्हें विदित होना चाहिए की शहरों से ज्यादा जनसँख्या गावों में बसती है। तो क्या गावों वालों की सुविधा, जीवन स्तर और उपयोगिता को वे उपयोगिता नहीं समझते?
‘फोरलेन संघर्ष समिति’ को चाहिए घरेलू सड़क
स्वयंभू ‘फोर लेन संघर्ष समिति’ को दरअसल फोरलेन नहीं एक घरेलू सड़क चाहिए, जो हर घर हर गाँव, हर दुकान और कस्बे से गुजरे। उन्हें कम ट्रेवल टाइम नहीं चाहिए, उन्हें घर बैठे बिज़नेस चाहिए।
यदि इनके बिज़नेस फोरलेन के बिना नहीं चल सकते तो क्या ये लोग अपना बिज़नेस 2-4 किलोमीटर दूर फोरलेन तक नहीं ले जा सकते? यूं भी तो लोग सैंकड़ो, हज़ारों किलोमीटर का सफर देश-विदेश के लिए तय करते हैं, अपनी रोजी रोटी के लिए। क्या घर बैठे थोड़ा बहुत समझौता भी नहीं कर सकते उनके लिए ताकि उनका ट्रेवल टाइम कम हो, परेशानी कम हो?
‘फोरलेन संघर्ष समिति’ से एक सवाल यह है, मान लीजिये आपके संघर्ष के जबाव में निचले क्षेत्रों के लोग भी संघर्ष पर उतर आये तो वे अपनी संघर्ष समिति का क्या नाम रखें, ‘फोरलेन संघर्ष समिति’ ही सही रहेगा?
और वैसे भी फोरलेन के लिए पुराने रोड से कई लिंक सड़कें समय के साथ-2 विकसित होंगी, जिसे रोड इंफ्रास्ट्रक्चर और भी मजबूत होगा।
इस तरह अलाइनमेंट (2) के तहत फोरलेन बन जाने से एक ऐसा वैकल्पिक मार्ग मिल जाएगा जिसकी जोगिन्दर नगर क्षेत्र के विकास को पंख लग सकते हैं।
भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) से आशा की जाती है कि उपरोक्त सभी तथ्यों को ध्यान में रखकर ही अंतिम और निष्पक्ष निर्णय लिया जाए जिसमें सभी का हित हो। अलाइनमेंट (2) के तहत क्षेत्र को एक नया वैकल्पिक, सुलभ और सुरक्षित मार्ग मिलेगा जिससे समय, पैसे और जान माल की बचत होगी, वहीँ पुराने रोड के वही पुरानी समस्याएं जारी रहेंगी, खासकर बरसात में भारी भू-स्खलन और टूट – फूट से होने वाला नुक्सान।
अलाइनमेंट (2) के फायदे:
✅ नया, वैकल्पिक, सुलभ और सुरक्षित मार्ग 🛣️
✅ समय, पैसे और जान-माल की बचत 💰
✅ क्षेत्र का विकास 📈
✅ हज़ारों नए रोजगार 💼
अलाइनमेंट (1) की समस्याएं:
❌ वही पुरानी समस्याएं जारी रहेंगी
❌ बरसात में भारी भू-स्खलन ⛈️
❌ टूट-फूट से नुकसान 😞
❌ साल भर निर्माण कार्य 🚧
निष्कर्ष: जनता की सुरक्षा और विकास ही सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए! 🙏✨







