आज से शुरू हो रहा विधानसभा का मानसून सत्र

हिमाचल विधानसभा का मानसून सत्र शुक्रवार सुबह 11 बजे से शुरू हो रहा है। इस बार सत्र लंबा है और तीन सितंबर तक कुल 10 बैठकें होंगी।

सत्र से पहले सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच टकराव की स्थिति बन चुकी है। भाजपा विधायको सुधीर शर्मा और डा. जनक राज पर दर्ज एफआईआर के बाद विपक्ष सदन में भी हमलावर होगा।

दूसरी तरफ सत्ता पक्ष में भी सत्र के लिए पूरी तैयारी कर ली है। स्पीकर कुलदीप पठानिया ने भी सर्वदलीय बैठक बुलाकर दोनों पक्षों के बीच सामंजस्य बनाने की कोशिश की है।

इस बैठक को नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर और संसदीय कार्य मंत्री हर्षवर्धन चौहान ने अटेंड किया है। सत्र शुरू होने से ठीक पहले कांग्रेस विधायक दल की बैठक से पूर्व मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने भी कहा कि विपक्ष सत्र के लिए तैयारी के साथ आए।

जनहित के मुद्दे उठाए। सरकार ने पहली बार दस दिन का सत्र रखा है। इससे पहले मानसून सत्र इतना लंबा नहीं होता था। विपक्ष को हंगामा या वर्कआउट करने के बजाय सदन में बात रखनी चाहिए।

सदन में इस बार बरसात से उपजी तबाही, केंद्र से मिलने वाली आपदा सहायता और प्रदेश में सडक़ों से लेकर शिक्षा, स्वास्थ्य, विभिन्न विभागों में खाली पदों, रोजगार और कानून-व्यवस्था के मुद्दों पर पूछे गए सवालों से गूंजेगा।

हालांकि सत्र शुरू होने से पहले कांग्रेस के वंदे मातरम् विवाद से भाजपा को नया मुद्दा मिल गया है। विपक्ष इस मुद्दे को भी विधानसभा में उठा सकता है।

सत्र के पहले दिन सदन में पूर्व विधायक स्वर्गीय विजेंद्र सिंह और राम चंद भाटिया के निधन पर शोकोद्गार व्यक्त किए जाएंगे। 27 अगस्त को गैर सरकारी सदस्य कार्य दिवस निर्धारित किया गया है। उधर, नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने कहा है कि इस मानसून सत्र में विपक्ष की भूमिका रचनात्मक रहेगी।

अगर हमारी बात को गंभीरता से लिया जाएगा तो हम साथ देंगे और अगर बात टालने की कोशिश होगी, तो विपक्ष सदन के अंदर और बाहर जनता की आवाज बनकर सरकार को अपनी बात मानने के लिए विवश कर देगा।

सर्वदलीय बैठक के बाद पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार सदन की गंभीरता को समझे और मुख्यमंत्री और उनके मंत्री ठीक बात बोलेंगे, तो उनकी बात सुनी जाएगी और लोकतंत्र की आवाज कुचलने का प्रयास किया तो मुंहतोड़ जवाब भी विपक्ष देगा।

उधर, संसदीय कार्यमंत्री हर्षवर्धन सिंह चौहान ने कहा कि सरकार की मंशा विपक्ष की आवाज दबाने की होती तो विधानसभा का दस दिन का सत्र नहीं रखा जाता।

उन्होंने विपक्ष से आग्रह किया कि सदन में प्रदेश की जनता से जुड़े मुद्दों पर चर्चा करे और सरकार से सवाल पूछे। सरकार हर मुद्दे का जवाब देने के लिए तैयार है।

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