सुप्रीम कोर्ट ने यूपीआई चार्ज पर रोक लगाने से किया इनकार
सुप्रीम कोर्ट ने यूपीआई पेमेंट पर 0.4 फीसदी चार्ज लगाने के केंद्र सरकार के फैसले पर रोक लगाने से इनकार कर दिया है। 15 अक्तूबर से यह शुल्क 2000 रुपए से ज्यादा के मर्चेंट पेमेंट पर लागू होगा।
हालांकि, कोर्ट ने केंद्र सरकार और आरबीआई को नोटिस जारी करके जवाब मांगा है कि इस नए नियम को लागू करने का आधार क्या है। चीफ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी मोहना की तीन जजों की बैंच ने वकील अंजन दत्ता की जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए यह आदेश दिया।
एडवोकेट अंजन दत्ता ने जनहित याचिका में सवाल उठाया कि 2,000 रुपए की सीमा क्यों तय की गई? यूपीआई और रूपे कार्ड के लिए नियम अलग क्यों हैं।
याचिका में इसे रद्द करने की मांग की गई थी। याचिका में यह भी कहा गया कि सरकार ने जनता से चर्चा किए बिना और कोई ठोस नियम बनाए बिना ही यह फीस तय कर दी।
इसके अलावा, पेमेंट एंड सेटलमेंट सिस्टम्स एक्ट, 2007 के एक नियम (धारा 10ए) को भी अदालत में चुनौती दी गई थी। आरोप है कि यह नियम सरकार को अपनी मर्जी से यह फैसला करने की छूट देता है कि कौन-सा डिजिटल पेमेंट फ्री रहेगा और किस पर चार्ज लगेगा।
सरकार की तरफ से एएसजी एन वेंकटरमण ने कहा कि आम लोगों के आपस में पैसे भेजने पर चार्ज नहीं लगेगा। देश के लगभग 96 फीसदी छोटे-मोटे दुकानदारी वाले भुगतानों पर भी इसका कोई असर नहीं पड़ेगा।
