किशाऊ बांध परियोजना पर प्रदेश को दिल्ली में मिली बड़ी कामयाबी

टौंस नदी पर प्रस्तावित किशाऊ बांध परियोजना पर हिमाचल को बड़ी कामयाबी मिली है। परियोजना को लेकर चला आ रहा मुख्य विवाद खत्म हो गया है।

मंगलवार को गृह मंत्री अमित शाह ही मौजूदगी में हुई पांच राज्यों और एक केंद्रीय शासित की बैठक में फैसला हुआ है कि प्रोजेक्ट पर 90 प्रतिशत खर्च केंद्र सरकार और शेष 10 फीसदी खर्च बाकी राज्य उठाएंगे।

इसमें हिमाचल पर कोई वित्तीय बोझ नहीं पड़ेगा। यानी कि छह राज्यों में आवंटित प्रोजेक्ट का 10 फीसदी खर्च हिमाचल नहीं उठाएगा, क्योंकि हिमाचल के हिस्से जो पानी आएगा, वह दिल्ली और राजस्थान को दे दिया जाएगा।

इस तरह हिमाचल के हिस्से में जो खर्च आ रहा था, उसे दिल्ली और राजस्थान वहन करेंगे। साथ ही हिमाचल के हिस्से लो बिजली आएगी, उससे हर वर्ष करोड़ों की आमदनी होगी। यह आत्म निर्भर हिमाचल की दिशा में बड़ा कदम है।

मंगलवार को हुई बैठक में केंद्रीय विद्युत मंत्री मनोहर लाल, केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सीआर पाटिल, हिमाचल के मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू, उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी, केंद्रीय गृह सचिव, केंद्रीय जल शक्ति सचिव, विद्युत मंत्रालय के सचिव और हिमाचल एवं उत्तराखंड सरकारों के मुख्य सचिव, एवं गृह मंत्रालय, प्रधान मंत्री कार्यालय और जल शक्ति मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी सम्मिलित हुए।

हिमाचल सरकार को इस डैम को बनाने को लेकर अपनी शर्तें केंद्र सरकार से मनवाने की कामयाबी मिली है। अब ऊपरी यमुना बेसिन में किशाऊ बहुउद्देश्यीय परियोजना के निर्माण को लेकर हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश, हरियाणा, राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली और राजस्थान के बीच समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर होंगे।

टौंस पर प्रस्ताति है प्रोजेक्ट
किशाऊ परियोजना टौंस नदी पर प्रस्तावित है और इसका लाभ हिमाचल प्रदेश तथा उत्तराखंड समेत संबंधित राज्यों को मिलेगा। परियोजना में 660 मेगावाट बिजली उत्पादन के साथ सिंचाई और जलापूर्ति का भी प्रावधान है।

परियोजना की अनुमानित लागत करीब 15 हजार करोड़ रुपए बताई गई है। इसमें लगभग 2 हजार करोड़ रुपए का बिजली घटक है, जबकि जल घटक की बड़ी लागत अब केंद्र सरकार द्वारा वहन किए जाने से हिमाचल के लिए परियोजना में भागीदारी अधिक आर्थिक रूप से व्यावहारिक होगी।

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