ड्रोन और सेटेलाइट से रखी जाएगी बांधों पर नजर
बादल फटने और फ्लैश फ्लड के बढ़ते खतरे के मद्देनजर हिमाचल में बांधों की निगरानी के लिए बड़ी तैयारी है। इसके तहत ड्रोन और सेटेलाइट से निगरानी का प्रस्ताव स्टेट डैम सेफ्टी ऑर्गेनाईजेशन ने रखा है।
इसके पीछे की बड़ी बजह यह है कि प्रदेश में अधिकांश बांध दुर्गम क्षेत्रों में स्थित हैं। जहां भारी बारिश, भूस्खलन, बर्फबारी और सडक़ बाधित होने की स्थिति में निरीक्षण दलों का समय पर पहुंचना कठिन हो जाता है।
ऐसे में बादल फटना, फ्लैश फ्लड, ग्लेशियर झील फटने (जीएलओएफ) और भूस्खलन जैसी घटनाओं के बढ़ते खतरे के बीच रियल टाइम निगरानी प्रणाली को और मजबूत करना आवश्यक बताया गया है।
स्टेट डैम सेफ्टी ऑर्गेनाइजेशन की वार्षिक रिपोर्ट में इप तथ्यों का जिक्र करते हुए उपरोक्त प्रस्ताव रखा गया है। इसके तहत बांधों की निगरानी में जीआईएस, ड्रोन, सेटेलाइट इमेजरी और रिमोट सेंसिंग तकनीक का उपयोग बढ़ाने की बात रिपोर्ट में कही गई है।
साथ ही सभी बांधों की तकनीकी जानकारी और अनुपालन रिपोर्ट को डिजिटल पोर्टल पर अपडेट करने तथा एकीकृत डिजिटल डैशबोर्ड विकसित करना भी इसमें शामिल है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि बांध सुरक्षा के लिए समर्पित तकनीकी स्टाफ, स्ट्रक्चरल इंजीनियर, हाइड्रोलॉजिस्ट, जियोलॉजिस्ट, जियोटेक्निकल इंजीनियरिंग, इंस्ट्रूमेंटेशन विशेषज्ञ और आपदा प्रबंधन विशेषज्ञों की टीम गठित करना आवश्यक है।
साथ ही इंजीनियरों और बांध संचालकों का नियमित प्रशिक्षण भी जरूरी बताया गया है। वर्तमान में ऊर्जा निदेशालय के कर्मचारियों को ही संगठन में अतिरिक्त जिम्मेदारियां सौंपी गई है।
यह कहती है वार्षिक रिपोर्ट
एसडीएसओ की वार्षिक रिपोर्ट कहा गया है कि वित्तीय वर्ष 2025-26 के दौरान चार प्रमुख बांध परियोजनाओं में आधुनिक अर्ली वार्निंग सिस्टम और संचार व्यवस्था को उन्नत किया गया है।
करछम जलविद्युत परियोजना में चेतावनी प्रणाली में नई ब्रॉडकास्टिंग सुविधा जोड़ी गई है। वहीं, बझोली होली परियोजना के खरूडू स्टेशन में नया वीसेट आधारित संचार नेटवर्क लगाया गया है।
मलाणा-दो परियोजना में अर्ली वार्निंग सिस्टम को जल प्रवाह और पानी छोड़े जाने की रियल टाइम निगरानी से जोड़ा गया है। कुठेहड़ बैराज में अर्ली वार्निंग सिस्टम और पब्लिक एड्रेस सिस्टम को सिंगल-स्विच तकनीक से जोड़ा गया है।
इससे एक बटन दबाते ही सायरन व चेतावनी संदेश एक साथ सक्रिय हो जाते हैं। 11 बड़े बांधों में सुरक्षा निगरानी से जुड़े सभी प्रमुख उपकरण सक्रिय हैं।
