मुख्यमंत्री मत्स्य पालन योजना से उत्तम सिंह को मिली मिली स्वरोजगार की राह
जोगिन्दरनगर : हिमाचल प्रदेश सरकार की जनकल्याणकारी योजनाएं ग्रामीण क्षेत्रों में स्वरोजगार को बढ़ावा देने और लोगों को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। मुख्यमंत्री मत्स्य पालन योजना का लाभ उठाकर उपमंडल जोगिन्दरनगर के कुंड गांव निवासी उत्तम सिंह ने मछली पालन को अपनी अतिरिक्त आय का साधन बनाया है।
आज वह इस व्यवसाय के माध्यम से सालाना लगभग 50 हजार रुपये की अतिरिक्त आय अर्जित कर रहे हैं। उनकी यह पहल ग्रामीण युवाओं के लिए स्वरोजगार की दिशा में आगे बढ़ने की प्रेरणा है।
वर्ष 2025 में शुरू किया था प्रोजेक्ट
उत्तम सिंह ने बताया कि उन्होंने वर्ष 2025 में मुख्यमंत्री मत्स्य पालन योजना के तहत मछली पालन का कार्य शुरू किया। इसके लिए उन्होंने तालाब का निर्माण करवाया, जिस पर लगभग 62,000 रुपये खर्च हुए। इसमें सरकार की ओर से उन्हें 49,600 रुपये का अनुदान प्राप्त हुआ। सरकारी आर्थिक सहायता मिलने से उन्हें व्यवसाय शुरू करने में काफी मदद मिली और स्वरोजगार की दिशा में आगे बढ़ने का अवसर मिला।
प्रशिक्षण से हासिल की तकनीकी जानकारी
योजना के लाभार्थी के रूप में उन्हें सरकार द्वारा ओडिशा में आयोजित तीन दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम में भाग लेने का अवसर भी मिला। प्रशिक्षण के दौरान उन्हें मछली पालन से संबंधित आवश्यक जानकारियां प्राप्त हुईं। इसके बाद उन्होंने अपने तालाब में मछली के 2,000 बीज डाले और व्यवसाय शुरू किया। उन्होंने कहा कि उचित प्रशिक्षण, मेहनत और लगन से उन्हें इस कार्य में अच्छा लाभ प्राप्त हुआ।
सालाना कमाते हैं 50 हजार रुपये
उत्तम सिंह के अनुसार, मछली पालन उनके लिए आय का अच्छा अतिरिक्त साधन बन गया है। इस व्यवसाय से वह सालाना लगभग 50 हजार रुपये की अतिरिक्त आय अर्जित कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि वह भविष्य में इस व्यवसाय को और अधिक विस्तार देना चाहते हैं, ताकि अपनी आय में वृद्धि कर सकें। उनके अनुसार, मछली पालन में स्वरोजगार की अच्छी संभावनाएं हैं और ग्रामीण क्षेत्रों में उपलब्ध संसाधनों का उपयोग करके युवा इस क्षेत्र में आगे बढ़ सकते हैं।
सीएम का जताया आभार
मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंदर सिंह सुक्खू का आभार व्यक्त करते हुए उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री मत्स्य पालन योजना जैसी योजनाएं आम लोगों को स्वरोजगार अपनाने और आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनने में सहायता प्रदान कर रही हैं। उन्होंने कहा कि सरकारी अनुदान और प्रशिक्षण से उन्हें अपना व्यवसाय शुरू करने का अवसर मिला।
क्षेत्र के युवा अपनाएं स्वरोजगार
बेरोजगार युवाओं से उन्होंने आह्वान किया कि वे रोजगार के लिए केवल सरकारी और निजी नौकरियों पर निर्भर न रहें, बल्कि स्वरोजगार के विकल्पों पर भी विचार करें। उन्होंने कहा कि नौकरी की तलाश में लंबे समय तक भटकने के बजाय युवा अपनी रुचि और क्षमता के अनुसार व्यवसाय शुरू कर सकते हैं। मछली पालन भी ऐसा ही एक विकल्प है, जिसके माध्यम से मेहनत और उचित मार्गदर्शन से अतिरिक्त आय अर्जित की जा सकती है।
उत्तम सिंह की यह पहल दर्शाती है कि सरकारी योजनाओं का लाभ उठाकर ग्रामीण क्षेत्रों में भी स्वरोजगार के नए अवसर विकसित किए जा सकते हैं। उनकी सफलता अन्य युवाओं को भी आत्मनिर्भर बनने और अपने संसाधनों का सदुपयोग करने के लिए प्रेरित करती है।
