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पठानकोट से जोगिन्दरनगर रेलमार्ग में फिर से बहाल होंगी सभी रेलगाड़ियां

जोगिन्दरनगर : नववर्ष में लोगों को तोहफा मिल सकता है। रेलवे विभाग द्वारा फिर से पठानकोट-जोगिन्दरनगर रेल मार्ग पर फिर से सभी रेलगाड़ियाँ चल सकती है। 25 दिसंबर तक पठानकोट-जोगिन्दरनगर रेलमार्ग पर फिर से रेलगाड़ियों को चलाने की तैयारी के लिए उत्तर रेलवे विभाग तैयारी में जुट गया है।

उत्तर रेलवे विभाग के इंजीनियर इन दोनों चक्की रेलवे पुल पर बिछी रेल लाइन की गुणवत्ता का आकलन कर रहे हैं। विभाग के अधिकारी निरीक्षण कर इस समय रेल गाड़ियों को पटरी पर दौड़ाने की पूरी तैयारी करने में लगे हुए हैं, इन गाडिय़ों के बंद होने से जहां हिमाचल का पर्यटन रुक गया था, वहीं आम जनता को भी बहुत परेशानी थी।

करीब तीन वर्ष हो गए चक्की का पुल टूट जाने से यह रेल यातायात बंद पड़ा है। लोगों ने भी इस रेल बहाली के लिए कई बार संघर्ष किया बीच-बीच में कुछ समय के लिए रेल विभाग द्वारा नूरपुर से कभी ज्वालामुखी रोड या फिर गुलेर तक या फिर बैजनाथ से कांगड़ा तक कुछ समय के लिए रेलगाड़ी चलाई, लेकिन बरसात में ज्वालामुखी के पास व कुछ अन्य स्थानों पर बरसात में रेल मार्ग का बहुत बड़ा नुकसान हुआ, जिसके कारण यह रेल यातायात बिलकुल बंद पड़ा है।

इस रेल यातायात के बंद होने से गरीब व्यक्ति, व्यापारी वर्ग और विशेष कर कर्मचारी व स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चे और कुछ गांव ऐसे थे, जो इस रेल यातायात से ही जुड़े हैं, उन्हें सबसे भारी नुकसान हो रहा था, क्योंकि रेलमार्ग से सफर करना बहुत ही सस्ता तथा बहुत ही आराम दे सफर है, जबकि बस द्वारा एक तो लंबा सफर दूसरा इतना किराया है कि गरीब आदमी सफर नहीं कर सकता है।

बस में क्योंकि रेल मार्ग से जहां 30 किराया लगता है, वहां बस में 100 से ऊपर किराया है, 70 में रेल द्वारा पठानकोट से बैजनाथ तक सफर कर सकते हैं, जबकि बस से यही सफर 300 के करीब है।

इस रेल यातायात के शुरू होने से हमारे पर्यटन की दृष्टि से मां ज्वालामुखी मंदिर, मां बगलामुखी मंदिर, कांगड़ा मंदिर व मां चामुंडा मंदिर, मसरूर मंदिर व पौंग डैम में फिर से पर्यटकों की भारी संख्या में बढ़ोतरी होगी।

जोगिन्दरनगर रेलवे स्टेशन के अधीक्षक रविंद्र पाल और बैजनाथ पपरोला के रजिस्ट्रेशन अधीक्षक राजेंद्र भारद्वाज ने बताया कि जोगिन्दरनगर से बैजनाथ पपरोला पर फिर से पठानकोट तक रेल सेवाएं पूरी तरह से बहाल होने से रेल यात्रियों को भारी लाभ मिलेगा।

अब देखना यह है कि सरकार तथा रेल विभाग कब से हरी झंडी दिखाकर पठानकोट से चक्की पुल पर गाड़ियों को चलाता है।

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