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मोबाईल के प्रयोग से डिप्रेशन की चपेट में आ रहे स्कूली बच्चे

मोबाइल इस्तेमाल से छात्रों के दिमाग पर बुरा प्रभाव पड़ रहा है। अठारह हजार सरकारी स्कूलों में पढऩे वाले छात्रों में से 60 प्रतिशत छात्र ऐसे है, जिन्हें भूलने की समस्या हो गई है। इसके साथ ही डिप्रेशन का शिकार भी कई छात्र छोटी- सी ही उम्र में होने लगी है। शिक्षा विभाग द्वारा जिला उपनिदेशकों व शिक्षा अधिकारियों द्वारा करवाए गए सर्वे के दौरान खुलासा हुआ है। ऐसे में शिक्षा विभाग ने अब अभिभावकों को अलर्ट जारी कर छात्रों को मोबाइल व सोशल मीडिया से दूर रखने को कहा है।

बता दें कि शिक्षा विभाग का यह सर्वे शिक्षकोंं से बातचीत करने के बाद व छात्रों से ली गई ऑनलाइन परीक्षा का आंकलन कर किया गया है। इसके साथ ही स्कूलों में पढ़ाने वाले कुछ शिक्षकों ने भी यह माना है कि क्लासरूम में भी छात्रों को पढ़ाया हुआ भी भूलने की आदत हो गई है। ऐसे में शिक्षा विभाग ने सोशल मीडिया का छात्रों का बहुत बार इस्तेमाल करने पर चिंता जताई है। इसके साथ ही कहा है कि अगर छात्रों को सोशल मीडिया के ज्यादा प्रयोग से बचाया नहीं गया, तो ऐसे में दिक्कतें बढ़ सकती हैं।

ऐसे में अब शिक्षा व स्वास्थ्य विभाग हैल्थ वेलनेस के तहत छात्रों को सोशल मीडिया व मोबाइल फोन के दुष्प्रभाव व इससे होने वाली बीमारियों के बारे में बताया जाएगा। अब शिक्षा विभाग छोटे बच्चों द्वारा स्कूलों में मोबाइल इस्तेमाल करने से कौन-कौन सी बीमारियां जकड़ सकती है, इस पर शिक्षकों को भी जागरूक किया जाएगा। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी 400 स्कूलों के शिक्षकों को किशोरा अवस्था में होने वाले स्वास्थ्य परिवर्तन और मोबाइल से होने वाली बीमारियों पर अलग से काउंसिलिंग करवाई जाएगी।

यहीं नहीं, मोबाइल और इंटरनेट के प्रयोग को लेकर भी छात्रों को जागरूक किया जाएगा। इसके लिए पहले चरण में 400 स्कूलों को शामिल किया जा रहा है और इन स्कूलों के शिक्षकों को प्रशिक्षण दिया जाएगा। ये प्रशिक्षण एससीईआरटी और डाइट केंद्रों पर शिक्षकों को दिया जाएगा, जिसके बाद शिक्षक स्कूलों में छात्रों को इसके बारे में जागरूक करेंगे। बता दें कि एसीईआरटी द्वारा स्वास्थ्य विभाग के सहयोग से स्कूली छात्रों के लिए एक मॉडयूल तैयार किया गया है, जिसमें किशोरा अवस्था में होने वाले परिर्वतन और बदलावों को लेकर छात्रों को जागरूक करना है।

शिक्षा विभाग के अनुसार किशोर अवस्था में बच्चों में कई बदलाव आते हैं, वहीं मोबाइल और इंटरनेट के दौर में बच्चे इसे अछुता नहीं हैं और वे इसका उपयोग भी काफी करते दिखते हैं, लेकिन मोबाइल और इंटरनेट का उपयोग कितना किया जाना चाहिए और वेबसाइट का प्रयोग करते वक्त किन बातों का ध्यान रखना चाहिए, इसके बारे में भी छात्रों को जागरूक किया जाएगा, ताकि बच्चे इसका सही उपयोग कर सके।

प्रदेश उच्च शिक्षा विभाग के संयुक्त निदेशक डा. प्रमोद चौहान ने बताया कि किशोर शिक्षा को लेकर पहले चरण में 400 स्कूलों को शामिल किया जाएगा। इसमें इन स्कूलों के शिक्षकों को एससीईआरटी और डाईट केंद्रों पर प्रशिक्षण दिया जाएगा, जो स्कूलों में छात्रों को जागरूक करेंगे।

कोविड – 19 की वजह से भी घरों में छात्र मोबाइल का प्रयोग पढ़ाई के लिए भी कर रहे है, ऐसे में अभिभावकों से अपील है कि वह इस संकट में केवल पढ़ाई के लिए मोबाइल का प्रयोग करें। मोबाइल व सोशल मीडिया का ज्यादा प्रयोग करने से छात्रों के दिमाग पर भी बुरा असर पड़ रहा है
डाक्टर अमरजीत शर्मा, निदेशक, उच्च शिक्षा

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