कढ़ी पत्ते के हैं गज़ब फायदे

मीठी नीम यानी कढ़ी पत्ते (स्थानीय भाषा में गंधेलू ) में अनेको गुण समाये हैं. आज हम कुछ विशेष गुण जैसे उच्च रक्तचाप, एक्जिमा, मर्दाना कमज़ोरी आदि में इसके उपयोग की विधि बता रहे हैं।

मीठा नीम मुख्यत हिमालयी क्षेत्र को छोड़कर सम्पूर्ण भारत में पाया जाता हैं। ये एक सदाबहार झाड़ीदार पेड़ हैं, और इसीलिए सदाबहार वनो में बहुतायत पाया जाता हैं। इसको कड़ी में स्वस्थ्य बढ़ाने के लिए डाला जाता हैं, जिस कारण इसको कढीपत्ता भी कहा जाता हैं। ये छोटे गमलो में घर पर भी लगाया जा सकता हैं। एक परिवार की ज़रूरत के अनुसार इसको घर पर लगा लेना चाहिए।

इसमें पाये जाने वाले गुणों के कारण इसको हर सब्जी में डाला जाता हैं। इसकी पत्तियों में विशिष्ट प्रकार की सुगंध आती हैं। इन पत्तो में एसेंशियल ऑयल्स होते हैं जिनमे मुरया सायनिन और कैरियोफायलिन प्रमुख हैं।

कढ़ी पत्ते का पेड़ (मुराया कोएनिजी, (Murraya koenigii;) ; अन्य नाम: बर्गेरा कोएनिजी, (Bergera koenigii), चल्कास कोएनिजी (Chalcas koenigii)) उष्णकटिबंधीय तथा उप-उष्णकटिबंधीय प्रदेशों में पाया जाने वाला रुतासी (Rutaceae) परिवार का एक पेड़ है, जो मूलतः भारत का देशज है। अकसर रसेदार व्यंजनों में इस्तेमाल होने वाले इसके पत्तों को “कढ़ी पत्ता” कहते हैं। कुछ लोग इसे “मीठी नीम की पत्तियां” भी कहते हैं। इसके तमिल नाम का अर्थ है, ‘वो पत्तियां जिनका इस्तेमाल रसेदार व्यंजनों में होता है’। कन्नड़ भाषा में इसका शब्दार्थ निकलता है – “काला नीम”, क्योंकि इसकी पत्तियां देखने में कड़वे नीम की पत्तियों से मिलती-जुलती हैं। लेकिन इस कढ़ी पत्ते के पेड़ का नीम के पेड़ से कोई संबंध नहीं है। असल में कढ़ी पत्ता, तेज पत्ता या तुलसी के पत्तों, जो भूमध्यसागर में मिलनेवाली ख़ुशबूदार पत्तियां हैं, से बहुत अलग है।

आइये जाने इस मीठी नीम यानी कढीपत्ते के 8 चमत्कारिक फायदे।

1. रक्तचाप नियंत्रित रखने हेतु कढ़ी पत्ता

उच्च रक्तचाप वाला व्यक्ति हर रोज़ ७-८ पत्ते हर रोज़ सुबह चबा चबा कर खाए तो उसका रक्तचाप नियंत्रित रहता हैं।

2. एंटीऑक्सीडेंट कढी पत्ता

ये पत्तिया शाम के समय चबाने से शरीर में विशिष्ट प्रकार की स्फूर्ति तथा उत्तेज़ना का संचार होता हैं। एक प्रकार से ये प्राकृतिक एंटीऑक्सीडेंट की भाँती प्रभाव देता हैं।

3. पेचिश – आंव में कढी पत्ता

अगर आपको दस्त की समस्या हो गयी हैं तो कड़ी पत्ते की कुछ मात्रा जल में हलके से उबालकर उस जल को पीने से तुरंत लाभ होता हैं।

4. अतिसार में कढी पत्ता

अतिसार में इसके ताज़े हरे पत्तो का अर्क बहुत लाभदायक हैं।

5. नेत्र रोगो में कढी पत्ता

नेत्रों की ज्योति बढ़ाने हेतु अथवा रतौंधी की समस्या होने पर मीठा नीम की पत्तियों का चूर्ण २ ग्राम मात्रा नित्य जल से ग्रहण करने से परम लाभ होता हैं। इस हेतु इन पत्तियों को छाया में सुखाकर फिर पीसा जाता हैं। ये चूर्ण जल्दी खराब नहीं होता और काफी समय तक सुरक्षित रहता हैं।

6. शुक्राणुवर्द्धन हेतु कढी पत्ता

जिन व्यक्तियों के वीर्य में शुक्राणु की संख्या कम होती हैं, उन्हें सन्तानोत्पत्ति का योग निर्मित होने में कठिनाई आती हैं। ऐसे व्यक्तियों को मीठा नीम की छाल के चूर्ण की एक ग्राम मात्रा शहद के साथ लेने से लाभ होता हैं। इसे दिन में एक बार सुबह के समय लेना चाहिए।

7. मर्दाना ताकत बढ़ाने हेतु कढी पत्ता

कड़ी पत्ता के पौधे की छाल का चूर्ण १ ग्राम अथवा इसकी जड़ का चूर्ण 1 ग्राम, दूध में प्रयाप्त औटाकर मिश्री मिला कर पीने से यौन उत्तेजना में वृद्धि होती हैं, साथ ही शरीर भी पुष्ट होता हैं।

8. एक्जिमा और घावों में कढी पत्ता

कड़ी पत्ता के बीज का तेल उत्तम कीटनाशक होता हैं, अत: एक्जिमा ठीक करने में अथवा घावों को सुखाने में यह अत्यंत लाभदायक रहता हैं। इस हेतु इसको लुग्धी बना कर घावों पर लगाया जाता हैं।

9. डायबिटीज़ को कंट्रोल करता है कढ़ी पत्ता

कढ़ी पत्ते में एंटी डायबिटिक एंजेट होते हैं। यह शरीर में इंसुलिन की गतिविधि को प्रभावित करके ब्लड शुगर लेवल को कम करता है। साथ ही इसमें मौजूद फाइबर भी डायबिटीज़ के रोगियों के लिए फायदेमंद होता है। इसके लिए अपने भोजन में कढ़ी पत्ते की मात्रा बढ़ाएं या फिर रोज सुबह तीन महीने तक खाली पेट कढ़ी पत्ता खाएं तो फायदा होगा। कढ़ी पत्ता मोटापे को कम कर के डायबिटीज को भी दूर कर सकता है।

10. नाक और सीने से कफ का जमाव कम करता है कढ़ी पत्ता

अगर आपको सूखा कफ, साइनसाइटिस और चेस्ट में जमाव है तो कढ़ी पत्ता आपके लिए बेहद असरदार उपाय हो सकता है। इसमें विटामिन सी और ए के साथ एंटी-बैक्टीरियल और एंटी फंगल एजेंट होते हैं, जो जमे हुए बलगम को बाहर निकालने में मदद करता है।  कफ से राहत पाने के लिए एक चम्मच कढ़ी पाउडर को एक चम्मच शहद के साथ मिलाकर पेस्ट बना लें। अब इस मिक्सचर को दिन में दो बार पिएं।

11. लीवर को सुरक्षित करता है कढ़ी पत्ता

अगर आप ज्यादा एल्कोहल का सेवन करते हैं या फिश ज्यादा खाते हैं तो कढ़ी पत्ता आपके लीवर को इससे प्रभावित होने से बचा सकता है। कढ़ी पत्ता लीवर को ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस से बचाता है जो हानिकारक तत्व जैसे मरकरी जो मछली में पाया जाता है और एल्कोहल की वजह से लीवर पर पड़ता है। इसके लिए आप घर के बने हुए घी को गर्म करके उसमें एक कप कढ़ी पत्ते का जूस मिलाएं। इसके बाद थोड़ी सी चीनी और पिसी हुई काली मिर्च मिलाएं। अब इस मिक्सचर को कम तापमान में गर्म करके उबाल लें और उसे हल्का ठंडा करके पिएँ।

12. एनीमिया रोगियों के लिए उपयोगी कढ़ी पत्ता

कढ़ी पत्ते में आयरन और फोलिक एसिड उच्च मात्रा में होते हैं। एनीमिया शरीर में सिर्फ आयरन की कमी से नहीं होता, बल्कि जब आयरन को अब्जॉर्ब करने और उसे इस्तेमाल करने की शक्ति कम हो जाती है, तो इससे भी एनीमिया हो जाता है। इसके लिए शरीर में फोलिक एसिड की भी कमी नहीं होनी चाहिए क्योंकि फोलिक एसिड ही आयरन को अब्जॉर्ब करने में मदद करता है। अगर आप एनीमिया से पीड़ित हैं तो एक खजूर को दो कढ़ी पत्तों के साथ खाली पेट रोज सुबह खाएं। इससे शरीर में आयरन लेवल ऊंचा रहेगा और एनीमिया की संभावना भी कम होगी।

13. दिल की बीमारियों से बचाता है कढ़ी पत्ता

स्टडी के अनुसार, कढ़ी पत्ते में ब्लड कोलेस्ट्रॉल को कम करने वाले गुण होते हैं, जिससे आप दिल की बीमारियों से बचे रहते हैं। यह एंटी-ऑक्सीडेंट्स से भरपूर होते हैं, जो कोलेस्ट्रॉल का ऑक्सीकरण होने से रोकते हैं। दरअसल ऑक्सीकृत कोलेस्ट्रॉल बैड कोलेस्ट्रॉल बनाते हैं जो हार्ट डिसीज़ को न्यौता देते हैं। इसके लिए आप खाने में कढ़ी पत्ते की इस्तेमाल ज़्यादा करें या इसके कुछ पत्तों को कच्चा चबाएं।

कढ़ी पत्ता बड़ी आसानी से घरों में लग जाता है, ये गमलों में भी लग जाता है. आप इसको घर में लगाये और जब भी सब्जी इत्यादि बनायें तो इसको ज़रूर डालें, इस से सब्जी का स्वाद भी कई गुना बढेगा और उसमे औषधीय गुण भी आयेंगे.

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