तेरह वर्ष की मासूम की करवाई जा रही थी शादी, समय रहते रुकवाई!

बिलासपुर: बिलासपुर जिला में बाल विवाह का मामला सामने आया है। सूचना मिलने पर महिला एवं बाल विकास विभाग की बाल संरक्षण इकाई के अधिकारियों ने कोट थाना पुलिस की मदद से नयनादेवी हलके के बैहल में बाल विवाह होने से रुकवाया।

जिला कार्यक्रम अधिकारी वीके शर्मा ने खबर की पुष्टि की है। उन्होंने बताया कि नयनादेवी के बैहल गांव में एक बाल विवाह रुकवाया गया है। हालांकि यहां यह पहला ही ऐसा मामला सामने आया है। उन्होंने बताया कि मामला चाइल्ड हेल्प लाइन सोलन के माध्यम से प्रकाश में आया था।

उन्होंने बताया कि बैहल की नाबालिग लड़की रीना (काल्पनिक नाम) की आयु 13 वर्ष है, जिसकी शादी 28, 29 व 30 मार्च को गांव नीमआली नयनादेवी में मोनू (काल्पनिक नाम) नामक लड़के के साथ होने वाली थी। उन्होंने बताया कि जैसे ही मामला ध्यान में आया तो तत्काल जिला बाल संरक्षण अधिकारी रमेश चंद सांख्यान, अध्यक्ष बाल कल्याण समिति बिलासपुर अनिल शर्मा व शैली गुलेरिया संरक्षण अधिकारी लड़की के गांव बैहल पहुंचे। जब छानबीन की गई तो मालूम हुआ कि शादी लड़की के मामा के घर आनंदपुर में होनी तय हुई है ।

लड़की के घर पर ताला लगा हुआ था। उन्होंने बताया कि आंगनबाड़ी कार्यकर्ता से पूछताछ करने पर जानकारी मिली कि लड़की का परिवार मामा के घर शादी की तैयारी के लिए चला गया है, लेकिन गांव में किसी को भी शादी के बारे में जानकारी नहीं है। उन्होंने बताया कि राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला बैहल में शादी का कार्ड मिला, जिससे पूर्ण रूप से स्पष्ट हो गया कि लड़की की आयु 13 वर्ष (13 जुलाई, 2003) है और वह बैहल स्कूल में 7वीं कक्षा में पढ़ती है ।

वी के शर्मा के अनुसार जिला बाल संरक्षण अधिकारी एवं अध्यक्ष जिला बाल कल्याण समिति ने पुलिस थाना कोट में लिखित रूप में दिया था, जिस पर थाना के कार्यवाहक प्रभारी बलवीर सिंह ने हैड कांस्टेबल राकेश चंद को मौके पर भेजा। उन्होंने मौके पर जाकर लड़के के पिता को शादी रोकने के बारे में समझाया कि बाल विवाह कानूनी जुर्म है तथा इस पर अग्रिम कार्रवाई की जा सकती है।

तब जाकर दूल्हे के पिता ने लिखकर दिया कि वह शादी रोक रहे हैं। इस मौके पर ग्राम पंचायत मंडयाली के प्रधान तथा अन्य व्यक्ति भी उपस्थित रहे।

स्रोत : दिव्य हिमाचल

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